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देवेन्द्र जैन के पत्ते उड़ गए, रेस में रघुवंशी आगे | kolaras News

भोपाल। शिवपुरी जिले की सबसे ज्यादा मारामारी वाली सीट कोलारस में कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी लगभग तय हो गए हैं। सूत्र बता रहे हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महेंद्र यादव को रिपीट करने का निर्णय लिया है तो सीएम शिवराज सिंह ने इस बार वीरेंद्र रघुवंशी को मौका देने का मन बना लिया है। यदि यशोधरा राजे ने आपत्ति नहीं जताई तो रघुवंशी का नाम फाइनल है। 

देवेन्द्र जैन थे प्रबल दावेदार
कोलारस से उपचुनाव में भाजपा ने देवेन्द्र जैन को उम्मीदवार बनाया था। टिकट के लिए लॉबिंग करते समय देवेन्द्र जैन और उनके भाई जितेन्द्र जैन गोटू ने दावे किए थे कि 25 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कराएंगे परंतु शर्मनाक तरीके से हार गए। इसके बाद देवेन्द्र जैन ने भाजपा के भितरघात को इसका दोषी बताया। चुनाव 2018 के लिए देवेन्द्र जैन फिर से दावेदारी कर रहे थे। शिवपुरी में उन्हे सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था। 

भाजपा में वीरेंद्र रघुवंशी का विरोध
दरअसल, वीरेंद्र रघुवंशी कांग्रेस मूल के नेता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया से बगावत करके भाजपा में आए थे। सामान्य बातचीत में असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करते हैं इसलिए अक्सर लोग उनसे नाराज हो जाते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया का विरोध करते करते वीरेंद्र रघुवंशी 'सिंधिया विरोधी' हो गए। वो भाजपा में यशोधरा राजे सिंधिया का भी विरोध करने लगे। कोलारस में भाजपा नेताओं ने उपचुनाव में एक ही शर्त रखी थी कि वीरेन्द्र रघुवंशी के अलावा किसी को भी टिकट दे दिया जाए। 

यशोधरा की NOC जरूरी
सूत्रों का कहना है कि वीरेंद्र रघुवंशी का नाम सबसे आगे चल रहा है और लगभग तय हो गया है परंतु यशोधरा राजे सिंधिया की एनओसी जरूरी है। इसके लिए वीरेंद्र रघुवंशी को यशोधरा राजे सिंधिया से संपर्क करना होगा। यदि वो यशोधरा राजे सिंधिया से एनओसी ले आते हैं तो 'सिंधिया विरोधी' दिग्गज नाराज हो सकते हैं। अब देखना यह है कि वीरेंद्र रघुवंशी क्या कदम उठाते हैं और यशोधरा राजे सिंधिया का निर्णय क्या होता है। 
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