सृष्टि की रचना करने वाली की रचना वर्षो से कर रहा है यह माहौर परिवार

लोकेन्द्र सिंह, शिवपुरी। आज से नौ दुर्गा का प्रारंभ हो चुका र्हैं। इन नौ दिनो में जगत जननी माता के नौ रूपो की हम पूजा करते हैं। कहते है कि मां भगवती जिसे संसार में कई नामो और रूपो में पूजा जाता है, मां भगवती ने ही इस संसार की रचना की है, आज घट स्थापना का प्रथम दिन हैंं, शिवुपरी शहर और ग्रामीण में माता की मुर्तिया स्थापित होंगी, इस संसार की रचना करने वाली ममतामई मां की रचना वर्षो से शिवपुरी का एक महौर परिवार कर रहा हैं।

शिवुपरी शहर के फिजीकल क्षेत्र में निवास करने वाला संतोष माहौर महौर मूर्ती के संचालक का कहना है कि हम मां की मूर्तियो को बनाने का काम कई पीढियो से कर रहे हैं। जैसा होता आया है कि किसी प्रसिद्ध् मंदिर के पुजारी का काम उसकी पीढी ही करती है उसे मंदिर में बैठे उस देवता या मां ने ही यह वरदान दिया हैं,हमे भी ऐसा लगता है कि हमारे खानदान को भी यह आर्शीवाद है कि हमारी पीढी में एक न एक सदस्य मां की मूर्तिया बनाने का काम करेंगा।

हम करते भी आ रहे हैं। आप सभी भी पंडालो में शेरवाली की मूर्तियो के दर्शन करने जाते हैं। इनको देखकर लगता है कि इन मूर्तियो में साक्षात प्रकट होने वाली है देवी,लेकिन इन मूर्तिया को जान डालने का काम उक्त महौर परिवार भी करता हैंं। आगे बातचीत में संतोष ने कहा कि हम अपना काम पूरी ईमानदारी ओर मेहनत से करते हैं। इन मूर्तियो को बनाने का काम हम नौदुर्गा आने से 4 माह पूर्व ही शुरू कर देते हैं, इन मूर्तियो को बनाने के काम हमारा पूरा  परिवार महिलाओ सहित करता हैंं इसके अतिरिक्त मेरे यहां 4 कारीगर जिनका नाम रामकिशन माहौर, भोला माहौर, विजय माहौर ओर सुनील माहौर भी काम करते हैं।

इस महगाई के युग में बस जो परपंरा हमारे पूर्वजो ने दी है उसे निभा रहे हैं। लगात के आलावा सिर्फ दिहाडी ही निकल पाती हैं, कोई प्रोफिट नही बचा है इस काम में, लेकिन इन मूर्तियो के बनने के बाद जो लोगो को भाव इनमे आता हैं हमे इसमें ही संतोष हैं यह हमारी भक्ति है और यह सेवाभाव की पूंजी, जब हमारी बनाई गई मूर्तियो को देखकर कोई कहता हैं कि मानो भगवाती अपना लोक छोडकर यहा आकर बैठ गई है तो हमे लगता है कि हमारी तपस्या पूर्ण हो गई हैं। 
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