9 मौतो केे कलंक पर सीमा विवाद: मौत के झरने को शिवपुरी की पर्यटन लिस्ट से हटाया गया

Updesh Awasthee
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एक्सरे @ललित मुदगल/शिवपुरी। ग्वालियर और शिवपुरी जिले के बॉर्डर पर स्थित सुल्तानगढ वाटर फॉल जिसे अब मौत का झरना कहा जा रहा हैं, इसका सुंदर मनोहारी फोटो शिवपुरी जिला प्रशासन के द्वारा अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। इस मौत के झरने को लेकर ग्वालियर और शिवपुरी का प्रशासन में सीमा विवाद हो गया हैं, और शिवपुरी के वन विभाग ने तो पल्ला झाड़ते हुए कह रहा है कि हमारी सीमा तो इस झरने के 100 मीटर पहले ही खत्म हो जाती हैं। बताया जा रहा हैं कि सीमा विवाद के चलते ऐसा हुआ है आईए इस मामले का एक्सरे करते हैं...।

जैसा कि विदित है कि जब देश उत्साह पूर्वक आजादी का जश्न में शामिल था, तभी शिवपुरी और ग्वालियर जिले के सीमा पर पडऩे वाले सुल्तान गढ फॉल से दुखद खबर आ गई थी कि सुल्तान गढ फॉल पर अचानक पानी बढ़ जाने के कारण 45 लोग फंस गए और 9 लोग इस बाढ़ में बह गए। 

इस हादसे में 9 लोगो की पानी में बह जाने के कारण मौत हो गई। 15 अगस्त की रात में इन मौतों के कंलक को लेने के लिए दोनों जिले के प्रशासन के हाथ पैर फूल गए और सीमा विवाद शुरू हो गया था। बताया जा रहा है कि जब 16 तारिख के रेस्क्यू में बाढ में बहे लोगो के शव नही मिले तो यह सीमा विवाद और तेज हो गया। 

मोहना वृत जिला ग्वालियर राजस्व, सुभाषपुरा वृत राजस्व जिला शिवपुरी और सतनवाड़ा रेंज के नक्शे मौके पर बुलाए गए थे, सीमा विवाद को निबटाने के लिए। ग्वालियर जिले के राज्स्व विभाग का मानना था कि जिस चट्टान पर फंसे हुए लोग खड़े थे ग्वालियर जिले की सीमा वहीं तक हैं, लोग बाढ़ में बहकर जहां पहुंचे और उनकी मौत हुई वह क्षेत्र शिवपुरी जिले में आता है। 
यह विवाद क्यों शुरू हुआ इसकी अधिकृत जानकारी किसी के पास नही है लेकिन मौके पर नक् शे अवश्य खुल रहे थे। फॉरेस्ट ने फॉल से 100 मीटर पहले ही पल्ला झाड़ लिया था। 

एक पुरानी कहावत है कि जब ही राजा जेबन बैठे तभी रोटी ताती होवें। बस यही हाल प्रशासन का हैं जब भी सुल्तानगढ फॉल पर कोई हादसा होता हैं जब ही नपातौली शुरू होती हैं। इसी सीमा विवाद के कारण वहां पर कोई पुख्ता सुरक्षा इंतजाम प्रशासन के नही हैं। 

अब शिवपुरी प्रशासन ने तो एक कदम और आगे बढ़ते हुए देश में पर्यटन नगरी के रूप में पहचाने वाली शिवपुरी जिले का एक ओर पर्यटन कम कर दिया हैं। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर पर्यटन स्थलों के फोटो में से सुल्तानगढ फॉल का फोटो हटा लिया हैं। इस पूरे मामले में एक सवाल अवश्य खड़ा होता है, कि हादसों से ऐसे सबक लिया जाता हैं तो शिवपुरी के प्रशासन को जिले से निकली फोर लेन को भी अपने नक्शे से हटा लेना चाहिए क्यो कि हादसे तो रोड पर भी होते हैं, तो लोगों ने फॉरलेन पर चलना छोड़ दिया क्या नही........ तो शिवपुरी प्रशासन ने इस हादसे सबक नही लिया बल्कि पीछा छुड़ाया है..........
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