मंदसौर गोलीकाण्ड-जैन आयोग की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो: पीयूष शर्मा

शिवपुरी। जिस मंदसौर में सरेआम किसानों की गोली मारकर हत्या हुई हो उसमें जैन आयोग ने पुलिस एवं प्रशासन को ही क्लीन चिट दे दी, यह कैसे संभव है यह तो उस समय की स्थिति निर्मित हो गई जब 1998 में मुलताई में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए गोलीकाण्ड में करीब 24 किसानों की मौत हो गई थी जबकि उस समय 150 किसानों को गोली लगी थी तब की कांग्रेस सरकार ने पीसी अग्रवाल कमीशन बनाया था अग्रवाल कमीशन में ने भी जैन आयोग की तरह गोलीकाण्ड में सभी प्रशासनिक तथा पुलिस अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी थी और किसान नेतृत्व और किसानों को ही गोलीकाण्ड का दोषी ठहराया गया और फिर सजा सुना दी गई। 

कुछ इसी तरह का मामला मंदसौर में हुआ लेकिन यह प्रदेश सरकार के दबाब में हुआ जिसके चलते जैन आयोग ने मासूम किसानों के हत्यारों को क्लीन चिट देकर यह साबित कर दिया कि सत्ता के रसूख में सरकार कुछ भी मनमानी कर रही है यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा आम आदमी पार्टी अपने चार प्रमुख बिन्दुओं को लेकर पुन: जांच कर जैन आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किए की मांग करती है।

उक्त बात कही आम आदमी पार्टी के जिला संयोजक एड.पीयूष शर्मा ने जिन्होनें प्रदेश के मुख्यमत्री के नाम जिला प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में जैन आयोग की रिपोर्ट को उजागर करने व पार्टी की ओर से चार प्रमुख बिन्दुओं पर जांच रिपोर्ट की मांग की। इस दौरान आप पार्टी के कार्यकर्ता कोटा की यूथ विंग संभागीय अध्यक्ष मिथलेश सुमन, जी.एस.सक्सैना सचिव, विधानसभा सचिव शिवपुरी सतीश खटीक, भूपेन्द्र विकल जिला प्रवक्ता,जिला जनसंपर्क अधिकारी प्रभारी राजकुमार त्यागी, अभिषेक भट्ट, सादिक खान, शब्बीर खान, आसिफ खान, अमित योगी, ओमप्रकाश शर्मा सहा.वि.स.प्रभारी कोलारस, मंडलअध्यक्ष सुरेश रावत, बंटी खान, पूरन सेन, आदि शामिल रहे । 

इन चार बिन्दुओं पर की जांच रिपोर्ट की मांग
आम आदमी पार्टी द्वारा जैन आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने और अपने ही चार बिन्दुओं पर जांच रिपोर्ट की मांग की गई है जिसमें जैन आयोग की रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक  की जाए, वर्तमान भाजपा सरकार यह बताए कि मुलताई के दोषियों पर उसने क्या कार्यवाही की थी? दोनों ही गोलीकाण्ड में प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी तय की जाए एवं दोषी अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। अन्यथा की स्थिति में आम आदमी पार्टी को विरोध प्रदर्शन कर इस मामले को लेकर आन्दोलन करने बाध्य होना पड़ेगा। 
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