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GEETA PUBLIC SCHOOL ने झूठा प्रचार किया, दी बेतुकी दलील

शिवपुरी। शहर की प्रतिष्ठित माने जाने वाले स्कूल भी पेरेंट्स के साथ चीटिंग कर रहे हैं। वो लोगों को झूठी जानकारियां दे रहे हैं। गीता पब्लिक स्कूल का मामला कुछ ऐसा ही है। 3 दिन पहले गीता पब्लिक स्कूल ने एक समाचार स्थानीय अखबारों में छपवाया। इसमें दावा किया गया कि गीता पब्लिक स्कूल ने अपने छात्रों को उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए की IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी के साथ अनुबंध किया है। यह एक बड़ी खबर थी। IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी से पढ़ने की लालसा हर स्टूडेंट में होती है और हर पेरेंट्स यह चाहते हैं कि उनके बच्चे को IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी मिले लेकिन जब पूछताछ की गई तो पता चला कि यह एक झूठा प्रचार था। गीता पब्लिक स्कूल के पास IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी का कोई अनुबंध ही नहीं है। 

दरअसल, शिवपुरी समाचार डॉट कॉम के पाठकों ने जानना चाहा था कि क्या सचमुच गीता पब्लिक स्कूल की खबर सही है। IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी के लिए वो अपने बच्चों को दूसरे स्कूल से शिफ्ट करने को तैयार थे। शिवपुरी समाचार डॉट कॉम ने गीता पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर को अधिकृत रूप से सूचना दी एवं आग्रह किया कि वे अपने इस दावे को प्रमाणित करें कि उनका IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी से कोई अनुबंध हुआ है। हम वचनबद्ध थे कि अनुबंध की ऐसी किसी भी शर्त के सार्वजनिक नहीं किया जाएगा जो आमजन के लिए उपयोगी ना हो या फिर स्कूल के व्यवसाय को प्रभावित करती हो परंतु गीता पब्लिक स्कूल ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाया। 

स्कूल ने दिया बेतुका जवाब
शिवपुरीसमाचार.कॉम के सूचनापत्र पर गीता पब्लिक स्कूल के संचालक पवन शर्मा ने जो जबाब दिया वह चौकाने वाला आया है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा दी गई सूचना के अनुसार हमारे द्वारा हायर सेकेंडरी के विद्यार्थियों के लिए IIT की एक्सपीरियंसड फैकल्टीज के साथ अनुबंध किया गया है जिन्हें 10 से 15 वर्ष का कंपटीशन क्लासेज को पढ़ाने का अनुभव प्राप्त है। इस बात का उल्लेख कहीं भी नहीं है कि उनके पास IIT की डिग्री है। एक योग्य शिक्षक में संबंधित विषय को पढ़ाने की योग्यता व अनुभव होना प्राथमिक आवश्यकता होती है। 
स्कूल ने उस IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी किसी तरह के अनुबंध को प्रस्तुत नहीं किया। ना ही फैकल्टी की डिग्री इत्यादि दिखाए। प्रश्न का सबसे सरल जवाब केवल इतना था कि वो फैकल्टी की शैक्षणिक योग्यता एवं अनुबंध दिखा देते ताकि उनका दावा प्रमाणित हो जाता। 

स्कूल ने लिखा हमारे शहर शिवपुरी में ऐसे सैकड़ों शिक्षक है जिन्होंने हजारों कलेक्टर, एसपी, डॉक्टर, इंजीनियर बनाए हैं तो क्या उनके पास भी संबंधित विषय की डिग्री थी। 
बड़ा बेतुका जवाब दिया है स्कूल ने। स्कूल के प्रबंधक को नहीं पता कि IAS को पढ़ाने वाला IAS होता है, डॉक्टर को पढ़ाने वाला डॉक्टर और इंजीनियर को पढ़ाने वाला इंजीनियर। स्कूल को इतना भी नहीं पता कि एमकॉम का टॉपर साइंस नहीं पढ़ता। और यदि पढाने लगे तो इसे साइंस की एक्पीरिएंस फैकल्टी नहीं करते। 

स्कूल ने लिखा: साथ ही हमारे शहर में कितने ही योग्य पत्रकार हैं तो क्या उन्हें पढ़ाने वाले सभी शिक्षक के पास क्या पत्रकारिता की डिग्री थी, ऐसे कितने ही पत्रकार हैं जिनके पास कोई भी डिग्री नहीं है लेकिन उनकी कलम की ताकत आज पूरे हिंदुस्तान में बोल रही है।
यह टिप्पणी पूरी तरह से बेतुकी है, क्योंकि पत्रकारिता के लिए किसी डिग्री की आवश्यकता ही नहीं होती। यह ना तो कोई सरकारी नौकरी है और ना ही पेशा। यह तो समाजसेवा है। एक पत्रकार का चयन और उसकी योग्यता का निरीक्षण उसका संपादक करता है। स्कूल प्रबंधन तो पत्रकारिता के नीति नियम ही नहीं पता लेकिन टिप्पणी कर दी। 

स्कूल ने लिखा: विद्यालय प्रबंधन के द्वारा विद्यालय व विद्यार्थियों के स्टैंडर्ड को बढ़ाने के लिए संबंधित कदम उठाए जा रहे हैं। धन्यवाद
यह तो हर स्कूल करता है। सवाल तो सिर्फ इतना सा है कि IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी कौन है। उसकी अपनी योग्यता क्या है और अनुबंध क्या हुआ है। क्या वो पूरे सत्र पढ़ाएगा या साल में एक दिन वर्कशॉप लेने आएगा। 

इन संस्थानों में आतीं हैं IIT की एक्सपीरियंस फैकल्टी

शहर में इंडकटेन्स एज्युकेयर ओर ईम्पल्स शहर में ऐसे शिक्षण संस्थान है जो आईआईटी जैसी उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा बच्चों को दे रहे है, जिसमें ईम्पल्स से अभी कोई संपर्क नही हो पाया है और इंडकटेन्स ने अपनी फैक्लटी के सभी सदस्यों के ऐजूकेशन संबधी दास्तावेज मेल कर किए है। ईम्पल्स ने जो प्रतिक्रिया दी उसे कहते हैं दावा। 
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