ये हैं कोलारस के मुसद्दीलाल: 200 जनसुनवाईयों में आवेदन, फिर भी समस्या बरकरार

Updesh Awasthee
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राहुल शर्मा/कोलारस। ऑफिस-ऑफिस सीरियल तो याद होगा आपको। उसके मुख्य पात्र मुसद्दीलाल को कौन भुला सकता है। भारत की प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर इतना जोरदार तमाचा छोटी स्क्रीन पर आज तक किसी ने नहीं मारा। ऐसा ही एक मुसद्दीलाल कोलारस में भी है। पट्टे की जमीन पर अपना हक पाने के लिए उसने पिछले 10 साल में 250 से ज्यादा शिकायतें कीं। मंत्री, संत्री, अधिकारी, जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन और जहां-जहां शिकायतें हो सकतीं हैं। जब-जब कोई सामने आया, उसने अपना आवेदन जरूर दिया है। किशोरी जाटव उस आवेदक का नाम है जो जनसुनवाई में एक ही शिकायत कई बार लेकर पहुंचा परंतु आज तक निराकरण नहीं हुआ। 

मामला यूं है कि किशोरी जाटव पूत्र भटुआ जाटव निवासी ग्राम भाटी कि भूमी ग्राम भाटी में स्थित है जिसका मुख्य पालन पोषण का मुख्य श्रोत खेती ही है। जिसका पटटा वर्ष 1958-1958 में हो गया था जिसका सर्वे नंबर 223 रकवा 142 हैक्टर है। जो कि किशोरी जाटव के दादा के नाम पर दर्ज है लेेकिन उक्त किसान की भूमी पर ग्रामीणो ने फोरेस्ट विभाग कि मदद से भूमी को अधिग्रहण कर कृषि भूमि पर बाउंड्री खड़ी कर दी। किसान का कहना है इस जमीन पर उसके परिजन वर्षो से खेती करते चले आ रहे है। जिस जमीन का न तो अभी तक सीमांकन किया जा रहा है। न ही उक्त जमीन को नामांतरण किया जा रहा है। एसी के चलते किसान वर्षो से दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। 

जिसके बाद शुरू हुआ ऑफिस ऑफिस सीरियल के हीरो मुसददीलाल का शो। एक के बाद एक किसान द्वारा हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई और तमाम मंत्री और अधिकारीयों के यहां लगातार पिछले 10 वर्षो में करीब 200 आवेदन और करीब 50 से ज्यादा शिकायतें ऑनलाइन आज दिनांक तक कर चुका है। यहां चौकाने वाली बात है। बात यहीं तक नही रूकी लगातार 10 वर्षो में करीब 250 शिकायतें करने के बाद भी किसान की कोई सुनने को तैयार नही इन वर्षो में किसान ने दर्जनों अधिकारियों को आते जाते देखा है। 

लेकिन उसकी सुनने वाला या समझाईश देने वाला कोई नही मिला। 200 आवेदनों में से कोलारस एसडीएम, जनसुनवाई में दर्जनो आवेदन देने के साथ ही दर्जनों आवेदन जिला कलेक्टर जनसुनवाई के भी दिये है। जिसपर हर बार आवेदनों के बदले सिर्फ किसान को आश्वासन कि मिलता रहा है। सालों बीतने के बाद भी आज तक न तो किसान को उसका हक मिला न ही उसकी सुनवाई हुई। 
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