जलसंकट से जलसंघर्ष: जनता आगे आए नही नपा में होगा 8 करोड का जलउत्सव

एक्सरे ललितमुदगल,शिवपुरी। शिवपुरी के प्यासे कंठो की प्यास बुझाने वाली योजना सिंध जलावर्धन योजना कीचड़ में फस चुकी है। शहर में जलसंकट शुरू हो चुका है। अब हमे इस जलसंकट से संघर्ष करना है। कहते है कि किसी का संघर्ष किसी के उत्सव में बदल जाता है। शिवपुरी का जलसकंट हमारा जलसंघर्ष है और शिवपुरी नगर पालिका का जल उत्सव है। आईए इस पूरे जलसंकट-जलसंघर्ष-जलउत्सव का एक्सरे करते है। बताया जा रहा है कि शिवुपरी शहर में लगभग 800 ट्युवबैल है। नपा का कहना है कि इनमे से 222 ट्यूबवैल खुल गए है और 2-2 घटें पानी देतै है। लेकिन इस आकंडे के उल्ट लगभग इस समय के लगभग 400 से ज्यादा ट्यूबवैलो के कंठो से पानी सूख चुका है। और बचे हुए ट्यूबवैल कुल्ला कर रहे है। 

नगर पालिका ने इस शहर को पानी पिलाने के लिए प्रत्येक वार्ड में 1-1 टैंकर शुरू कर दिया। प्रत्येक वार्ड में एक टैंकर 6-6 चक्कर लगाऐगा। इसके अतिरिक्त विधायक निधि से विधायक ओर मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने नगर पालिका को 12 टैंकर दिए है,इनमें से 8 टैंकर पानी शहर को बाट रहे है। इसके आलावा बडे टैंकर भी नपा गर्मीयो मेें चलाती है। 

कुल मिलाकर इन 3 महिनो में नगर पालिका शहर को पानी बाटने, लाईट का बिल अतिरिक्त मेनटिनैंस और स्र्टाटर खर्चे  में 8 करोड रू खर्च करेंगी। अगर जनता और मिडिया ने इस मुद्दे पर ज्यादा हाय-तौबा मचाई तो यह बजट और बड सकता है। शहर का जलसंकट आपका जलसंघर्ष है और नगर पालिका का 8 करोड खर्च करने में जलउत्सव मन जाता है। 

जैसा कि विदित है कि टैंकरो द्ववरा पानी बाटंने में जमकर भ्रष्टाचार किया जाता है। कागजो में पानी के टैंकर दौड जाते है। जनता हाथ मेें कट्टी लेकर पानी की जुगाड में लगी रहती है। 

बिना मिलावटी खबरो को प्रकाशित करने वाला शिवपुरी समाचार डॉट कॉम ने इस पूरे मामले कीे बारिकी पडताल की। अगर हम थोडे से भी जागरूक हो गए तो शिवपुरी का जलसंकट शिवपुरी नपा कर्मियो और जनप्रतिनिधियो का जलउत्सव में नही बदलेगा। पानी बाटने में भ्रष्ष्टाचार नही होगा। इसमे आपको और हमको आगे आना है। अभी तक जो खबर आई, टैंकरो के चक्कर कम लगाए जाते है और कागजो में यह टैंकर दौडाए जाते है।

इन टैंकरो की लॉग बुक बिल बनाते समय भरी जाती है, लॉग बुक में यह दर्ज होता है कि इस तारिख को इस जगह या गली मोहल्ले में पानी बाटा था। नियमानुसार तो लॉग बुक टेंकर चालक का साथ में रखना होता है,जिससे आमजन या संबधित अधिकारी कर्मचारी कभी भी चैक कर ले। आज जनमानस भी पानी के बटोने के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए टेंकर चालको से लॉग बुक चैक करे। 

अगर पानी के बटौने में भ्रष्टाचार को रोकना है तो टैंकरो की लॉग बुक 24 घटें के टैंकरो के  चक्कर दर्ज करवाने का नियम कडा करना होगा। जनमानस के पास जब भी टैंकर आए और उससे पानी भरे तो उसका फोटो खिचकर समय गली मोहल्ला लिखकर वायरल करे जिससे टैंकर चालक में भय उत्पन्न होगा की हर चक्कर के फोटो खिच रहे है। इसे सोशल पर वायरल करे तो आपके वार्ड में कहां-कहां टेंकर आया सबको जानकारी मिल सकती है।

इस मामले मेें कलेक्टर शिवपुरी का आगे आना होना। नगर पालिका में अधिकारियो और कर्मचारियो के घर बधुंआगिरी कर रहे 400 पंप अटेंटरो को मुक्त कराकर पानी के टैंकरो के मॉनिटिरिंग पर रखना होगा। पानी बेचने का काम पार्षद और टैंकर संचालक मिलकर करते है। किसी-किसी वार्ड में पार्षद का ही टैंकर होता है। ऐसा नही है कि सभी पार्षद पानी घोटाला करते है। परन्तु इस घोटाले की पहली कडी पार्षद से ही जुडती है। 
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