शिवपुरी। आम आदमी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष आलोक अग्र्रवाल के निर्देशानुसार जिला संयोजक एड.पीयूष शर्मा अब शिवपुरी में जिला प्रशाासन के विरूद्ध जनता की आवाज को बुलंद करेंगें। आप पार्टी के जिला संयोजक एड.पीयूष शर्मा ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि वह जिला प्रशासान के निवृत्तमान कलेक्टर राजीवचन्द्र दुबे, एसडीएम रूपेश उपाध्याय व नपा सीएमओ रणवीर कुमार के विरूद्ध शीघ्र ही शहर में चलाए गए अतिक्रमण अभियान को लेकर की गई अनियमितताऐं, मनमानी और प्रशासनिक गुण्डागर्दी का विरोध दर्ज कराते हुए माननीय उच्च न्यायलय में इन प्रशासनिक अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने को लेकर जनहित याचिका दायर करेंगें।
इस याचिका में माननीय उच्च न्यायालय को बताया जाएगा कि किस प्रकार से जिला प्रशासन ने अपनी हठधर्मिता का प्रयोग कर जनता के हितों पर कुठाराघात किया है और अपने पद और प्रभाव का जो कि जनता के हित में उपयोग करने हेतु उन्हें प्राप्त है उसका जनता के विरूद्ध स्पष्ट प्रयोग किया गया है।
हम अतिक्रमण मुहिम के विरोधी नहीं है लेकिन जिस प्रकार से प्रशासन ने रजिस्ट्रीशुदा भवनों को अतिक्रमण कहकर और रजिस्ट्री प्रस्तुत करने के बाद भी जनता की सुनवाई नहीं की और उन भवनों को क्षति पहुंचाई, यह नियम विरूद्ध है और इन कागजातों को दिखाने वाले लोगों से प्रशासन द्वारा कहा गया कि यह फर्जी रजिस्ट्रीयां है, यहां प्रशासन उन दस्तावेजों को झूठा और फर्जी करार दे रहा है जिसे लोगों ने नपा और राजस्व के हाथों में निर्धारित शुल्क जमा कर वैध रजिस्ट्री कराई।
इस तरह की मनमानियों को लेकर माननीय उच्च न्यायालय को बताया जाएगा साथ ही एड.पीयूष शर्मा ने जनता से अपील की है कि यदि कोई रजिस्ट्रीशुदा भवन अथवा भूखण्ड है तो ऐसी स्थिति में सिर्फ न्यायालय को यह हक है कि उसके स्वत्व, स्वामित्व व आधिपत्य का निर्धारण करें ना कि कोई प्रशासनिक अधिकारी।
उस रजिस्ट्री के फर्जी होने का डिक्लेरेशन(घोषणा) कराए बिना अतिक्रमण कहकर तोडऩा नायजाज और प्रशासनिक अधिकारों का दुरूपयोग है, यहां प्रशासन ने माननीय न्यायालय का मजाक उड़ाया है। एड.पीयूष शर्मा ने बताया कि जिस प्रकार से शिवपुरी शहर की 22 सडक़ों के चौड़ीकरण हेतु शिवपुरी विकास परियोजना 2001 प्रस्ताव के रूप में तैयार की गई, जो कि शिवपुरी विकास योजना 2001 म.प्र.नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम 1973 के प्रावधान के अंतर्गत संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश म.प्र.द्वारा प्रकाश्तिा की गई है जो 8.8.1988 को प्रकाशित हुई।
परन्तु आज दिनांक तक इस प्रकाशन के तहत नागरिकों द्वारा प्रस्तुत की गई आपत्तियों का निराकरण नहीं किया गया है और यह योजना आज तक वैध रूप से अस्तित्व में नहीं आई है तो प्रस्तावित 22 रोड़ों के चौड़ीकरण का उस योजना के अस्तित्व में आए बिना लागू करने का प्रश्न ही नहीं उठता।
