शिवपुरी। बाल कल्याण समिति ने गर्भ में बालिका की हत्या करने वालों से अपील की है कि वह बेटे की चाहत में या लालच में जांच उपरांत बालिका की पुष्टि होने पर उसकी हत्या न करें। बल्कि उक्त बालिका को पैदा होने से और शिशुगृह को समर्पित करें।
ताकि उन घरों में उजियारा हो सके जिनके आंगन में खेलने के लिए कोई बालक या बालिका नहीं है। ऐसा कर न केवल वह पाप से बचेंगे बल्कि सूनी गोद को भी भर एक पुण्य का कार्य कर सकेंगे।
प्रेस को जारी बयान में जिला बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन, सदस्यगण श्रीमती उमा मिश्रा, विनय राहुरीकर और दीपक शिवहरे ने बताया कि इन दिनों अक्सर यह देखने में मिल रहा है कि बेटे के लालच में द पति या तो कोख में ही बालिका की हत्या करा देते हैं या पैदा होने उपरांत परित्यक्त कर उसे फैंक देते हैं या फिर छोड़ देते हैं जो कि एक गंभीर अमानवीय कृत्य है।
ऐसे द पंति को परिवारजनों को चाहिये कि सर्व प्रथम वह ईश्वर के दिये तोहफे को स्वीकार करें। क्योंकि बेटी एक नहीं बल्कि दो-दो परिवारों को संभालती है और फिर प्रत्येक बच्चा अपनी किस्मत लेकर आता है।
शासन ने भी बेटी की जि मेदारी के विकल्प को स्वयं संभाल रखा है। इसलिए ऐसे लोग ऐसी अनचाही बेटी को मनोभाव से पैदा होने दें और शिशुगृह में पहुंचकर उसे समर्पित कर दें या फिर बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थित होकर उन्हें सौंप दें या फिर चाईल्ड लाईन पर कॉल कर उन्हें सौंप दें।
लेकिन कृप्या कर निर्दोष बच्ची की हत्या के खून से अपने हाथ नहीं रंगें। संस्था व समिति ऐसे बच्चों को नियमानुसार केन्द्रीय दत्तकग्रहण अभिकरण की गाइडलाईन के तहत उन द पत्तियों को बच्ची को सौंपेगे। जिनके लिए बालिका की चाहत अपनी जिंदगी से बढ़कर है। बाल कल्याण समिति ने उन अनब्याही लड़कियों और युवतियों को भी ऐसा अमानवीय कृत्य करने से मना किया है।

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