अंडगें का दूसरा नाम बनी सिंध जलावर्धन योजना,नए अंडगें में पाईप बने गतिरोध

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। सिंध जलावर्धन योजना में आये गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहे। दोशियान कंपनी काम शुरू करने के लिए एडवांस के रूप में आठ करोड़ रूपए की राशि मांग रही थी। जिसे कैबिनेट ने मंजूर कर लिया। लेकिन अब पाईप लाईन बदलने को लेकर एक नया गतिरोध आया है। 

इस विषय में दोशियान कंपनी ने नगर पालिका को अवगत करा दिया है। देखना यह है कि इस मामले में नगरपालिका और शासन क्या निर्णय लेती है। उधर दोशियान कंपनी ने अपने द्वारा तैयार किये गए अनुबंध की कॉपी भी सीएमओ रणवीर कुमार को सौंप दी है और सीएमओ ने नगरपालिका के सलाहकार को उक्त प्रति देकर उनसे राय मांगी है। 

दोशियान कंपनी के महाप्रबंधक महेश मिश्रा का कहना है कि यदि हमारे अनुबंध पर नगरपालिका सहमति व्यक्त करती है तो वे अनुबंध करने के लिए दोशियान कंपनी के संचालक रक्षित दोशी को शिवपुरी बुला लेंगे और शीघ्र ही जलावर्धन योजना का कार्य प्रारंभ हो जाएगा तथा दिस बर 2016 तक शिवपुरी शहरवासियों को सिंध का पानी सुलभ हो सकेगा। 

सिंध जलावर्धन योजना में नेशनल पार्क की दिक्कत खत्म नहीं हुई है। पाईप लाईन डालने के लिए नेशनल पार्क क्षेत्र में पेड़ काटे जाने की अनुमति अभी तक प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि नेशनल पार्क क्षेत्र में बिना पेड़ काटे पाईप लाईन डाली जा सकती है। 

इसी कारण शासन स्तर पर यह तय किया गया है कि नेशनल पार्क क्षेत्र के बाहर से पिलर पर एम.एस. पाईप डाले जायें। नेशनल पार्क क्षेत्र में लगभग 9 कि.मी. ल बी पाईप लाईन डालनी थी। अनुबंध की शर्तो के अनुसार पहले नेशनल पार्क क्षेत्र में अण्डर ग्राउण्ड जीआरपी पाईप डाले जाने थे, लेकिन नई परिस्थिति में एम.एस पाईप डाले जा रहे हैं। 

दोशियान कंपनी का कहना है कि उसने 9 कि.मी. ल बी पाईप लाईन डालने के लिए जीआरपी पाईपों की खरीदी कर ली है और  वे पाईप शिवपुरी में है। ऐसी स्थिति में नगरपालिका और शासन को पहले स्पष्ट करना होगा कि नेशनल पार्क क्षेत्र में जीआरपी पाईप डाले जाने हैं या फिर पिलर पर एम.एस पाईप डालकर पाईप लाईन तैयार की जाएगी।  

दोशियान कंपनी के महाप्रबंधक महेश मिश्रा कहते हैं कि स्थिति स्पष्ट होने के बाद वह अपने जीआरपी पाईपों को दूसरे प्रोजेक्टों में खपा सकते हैं, लेकिन इस विषय में उन्हें स्पष्ट रूप से कोई बात नहीं बताई जा रही है। जिससे भ्रम पूर्ण स्थिति बनी हुई है। बह कहते हैं कि यदि एम.एस पाईप नेशनल पार्क क्षेत्र में डाले जायेंगे तो सवाल यह हैै कि हमारे द्वारा खरीद किये गए जीआरपी पाईपों का क्या होगा?

इनका कहना है 
एम.एस पाईप की रेट एक हजार रूपए मीटर की है जबकि जबकि जीआरपी पाईप की रेट 600 रूपए मीटर की हैं। हालांकि शासन द्वारा कहा जा रहा है कि इस अंतर की राशि का वह भुगतान करेंगे। लेकिन हमारी दिक्कत यह है कि खरीद किये गए जीआरपी पाईप का क्या होगा। यह भी अभी स्पष्ट नहीं बताया जा रहा कि नेशनल पार्क क्षेत्र में एम.एस. पाईप डाले जायेंगे या नहीं?
महेश मिश्रा महाप्रबंधक दोशियान कंपनी
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