शिवपुरी। एक प्राइवेट कंपनी दिलीप बिल्डकॉन द्वारा कराए जा रहे अवैध उत्खनन का विरोध आदिवासियों को ही भारी पड़ गया। पुलिस ने अवैध उत्खनन का विरोध करने वाले 'सहरिया क्रांति' के संयोजक संजय बेचैन एवं अन्य आदिवासियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर डाली।
याद दिला दें कि शिवपुरी में फोरलेन का निर्माण कर रही दिलीप बिल्डकॉन ने भोले भाले आदिवासियों को बरगलाकर उनके खेतों में उत्खनन शुरू कर दिया था। क्षेत्र में आदिवासी हितों के लिए काम करने वाले संगठन 'सहरिया क्रांति' को जब इसकी सूचना मिली तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान अवैध उत्खनन कर रहे 50 से ज्यादा डंपर भी आदिवासियों ने पकड़े और पुलिस के हवाले किए।
उम्मीद थी कि पुलिस अवैध उत्खनन में लगे डंपरों को जब्त कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करेगी परंतु पुलिस मौन हो गई। इधर कार्रवाई की मांग को लेकर आदिवासियों का प्रदर्शन लगातार जारी रहा। अंतत: आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस ने उल्टी कार्रवाई कर डाली। जब्त डंपरों को मुक्त कर दिया गया जबकि विरोध कर रहे सहरिया क्रांति के संजय बेचैन सहित साथी आदिवासियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई।
यहां बता दें कि इस घटनाक्रम से एक दिन पूर्व ही कलेक्टर की अध्यक्षता में टास्क फोर्स की बैठक का आयोजन कर पुलिस, वन, राजस्व और माइनिंंग विभाग को निर्देश दिए गए कि अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए।
और दूसरे ही दिन करई कैरऊ के आदिवासियों के पट्टे की भूमि पर फोरलेन निर्माण क पनी के कर्ताधर्ताओं की तमाम मशीनरी ड परए जेसीबी आदि खेतों पर खनन करते दिखाई दिए जिसका सहरिया क्रांति संगठन ने पट्टाधारकों के साथ इस खनन का विरोध जताया।
- नहीं है प्रशासन पर जबाव
- क्या आदिवासियों को दी गई सरकारी पट्टे की भूमि पर खनन का अनुबंध किया जा सकता है.
- फोरलेन निर्माण में प्रयुक्त खनिज और उसकी चुकता की गई रायल्टी का सत्यापन क्या अब से पूर्व मायनिंग विभाग ने किया।
- पट्टे की जमीन पर उत्खनन की अनुमति प्रशासन के किस अधिकारी ने दी और यदि अनुमति नहीं थी तो उत्खनन कर रही मशीनरी को बजाए जब्त करने के कैसे छोड़ा गया।
- जिले भर में अवैध उत्खनन का सिलसिला चल रहा है मगर प्रशासन मौन क्यों है वह सिर्फ इक्का दुक्का कार्यवाही अवैध परिवहन पर करता है जबकि उत्खनन को छूट दी जा रही है।
- आदिवासियों की कृषि पट्टे की भूमि का लैण्ड यूज किसने और किस नियम से बदला
- पुलिस ने अपने ही खेतों पर खनन रुकवाने की मांग कर रहे कमजोर सहरियाओं की अनसुनी कर क पनी की गलत गतिविधियों को कैसे संरक्षण दिया उल्टे विरोध कर्ताओं पर कार्यवाही किसके दबाव में की गई।
मैं आखरी सांस तक आदिवासियों के लिए लड़ता रहूंगा
अपने खिलाफ हुए पुलिस प्रकरण पर प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए संजय बेचैन ने कहा कि आदिवासी हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पहले उन्होंने प्रलोभन दिया था, अब दवाब बनाया है परंतु उन्हें यह नहीं मालूम कि ये खेत ही आदिवासियों का जीवन है। यदि इन्हे खोद दिया गया तो कुछ नहीं बचेगा। इस आंदोलन के लिए हम प्राणों की आहुति तक देने को तैयार हैं।


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