योगेन्द्र जैन@पोहरी। जिले से 35 किमी दूर पोहरी तहसील के किले में बसे अति प्राचीन जो लगभग 1600 वर्ष पूर्व में बना श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर अपने वैभव एवं अतिशय का जीत जागता उदाहरण है।
इस मंदिर में मूलनायक आदिनाथ भगवान् की अति प्राचीन एवं अतिशयकरी प्रतिमा बिराजमान है जैन मंदिर में 3 बेदियां है जो मूलनायक के दाईं ओर मूलनायक अजितनाथ भगवान की प्रतिमा है।
और बाईं ओर पोहरी से 8 किमी दूर खेत में खुदाई के दौरान अति प्राचीन एवं चमत्कारी चंद्रप्रभु भगवन की प्रतिमा बिराजमान है।
मंदिर जी के बाईं ओर प्राचीन कुआ स्थापित है इस अतिशयकारी मंदिर जी में अभी भी सर्प द्वारा भगवान का पूजन अभिषेक देखने कभी कभी मंदिर परिसर में आकर और पूजन एवं अभिषेक होने के बाद अद्रश्य हो जाते है।
अभी तक किसी को भी मालूम नहीं है कि 7 फुट लंबा सांप कहाँ से आता है और कहाँ चला जाता है किसी को भी मालूम नहीं है मंदिर जी में लगभग 9 से10 बर्ष पूर्व मूलनायक बेदी पर बिराजमान बाहुबली भगवन की प्रतिमा पर अभिषेक होते हुए पोहरी एवं शिवपुरी के हजारो भक्तो ने प्रत्यक्ष देखा था।
यह अभिषेक कौन कर रहा है यह किसी को नहीं दिखाई दिया सिर्फ प्रतिमा जी पर जल के अलावा कुछ भी नहीं दिख रहा दूसरे दिन स्थानीय लोगों को यह अतिशय नहीं दिखा पर शिवपुरी से आये भक्त लोगो को अभिषेक होते हुए दिखा।
मंदिर जी में आज भी दोपहर के समय पूजन एवं श्याम कालीन भक्ति भाव पूर्वक आरती देबों द्वारा आज भी की जाती है यह पूजन एवं आरती कई लोगो ने सुनी है।


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