ललित मुदगल एक्सरे/शिवपुरी। पोहरी रोड पर सिंहनिवास गांव के पास बन रहे फोरलेन बना रही कंपनी दिलीप बिल्डकॉन अभी तक आदिवासियों के झमेले में फंसी थी, अब रोड एक्सिडेंट के मामले में भी फंसती नजर आ रही है। यहां हुईं तीन मौतों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं। लोग इसे पुल की बलि बोल रहे हैं तो पुलिस ने वाहन चालकों की लापरवाही माना है परंतु सच तो यह है कि इस मामले में असली दोषी दिलीप बिल्डकॉन है, वो कंपनी जो फोरलेन पर पुल का निर्माण कर रही है।
कंपनी ने अपनी काली करतूत छिपाने के लिए रातों रात उस गड्ढे को भरवा दिया जिसमें गिरने से 2 लोगों की मौत हुई। मजबूर पुलिस ने वाहन चालक की लापरवाही दर्ज की है जबकि वो ऐसा गड्ढा है जिसके शिकार आरटीओ और यातायात प्रभारी भी हो जाते। गड्ढे से पूर्व कोई चेतावनी या संकेत नहीं था। मौत के बाद फटाफट संकेत लगा दिए गए।
यदि लापरवाही वाहन चालक की ही थी तो रातों रात ऐसी सक्रियता क्यों और
यदि कंपनी दोषी है तो उसे बचाने का उपक्रम क्यों ?
इस दिशा में जांच क्यों नहीं की जा रही ?
गुंजाइश है तो तलाशना चाहिए ?
मृतकों के परिजनों को कंपनी की ओर से मुआवजा दिलवाया जाना चाहिए।

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