जलक्रांति सत्याग्रह: इस भरी गर्मी में भी जम गया भाजपा नेताओ का खून

Updesh Awasthee
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ललित मुदगल@एक्सरे/शिवपुरी। वर्षो से पीने के पानी की बाट जोह रहे शिवपुरी नगर के निवासियो के सब्र टूट गया और परिणाम स्वरूप जलक्रांति सत्याग्रह का आगाज शुरू हो गया। इस अंादोलन में सगठनो और जनता की भागीदारी जारी है। परन्तु इस भरी गर्मी में भी भाजपा नेतााओ का खून जम गया है।

विगत 16 जून से पब्लिक पार्लियामेंंट द्वारा जलक्रंाति सत्याग्रह का आगाज किया गया था। कल इस सत्याग्रहीयो के आग्रह पर व्यापार मंडल द्वारा स्वैछिक बंद ने इस सत्याग्रह की आवाज को बुलंद कर दिया। कल इस महाबंद ने यह सिद्व कर दिया था कि पूरे शहर के नागरिक ही पीने के पानी के लिए सत्याग्रह कर रहे हो।

शिवपुरी की जल समस्या मेरे पार्षद से लेकर इस देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी तक के संज्ञान में है। वह भी इस लोक सभाचुनाव में इस मुद््दे पर एक दमदार भाषण पेल गए थे वह भी वादा कर गए थे कि हम जीतेंगे तो पानी की समस्या से यह शहर जल्द मुक्त होगा। शहर भाजपा ने जीता देश भाजपा ने जीता और शिवपुरी फिर विश्वास में हारी।

शहर के प्यासे कंठो की प्यास बुझाने वाली योजना जलावर्धन योजना की जगमोहन सिंह सेंगर अध्यक्ष नपा के कार्यकाल में 25 जनवरी 2006 को नपा से प्रस्ताव पारित कर राज्यशासन को भेजा और वहां केन्द्र को केन्द्र में कांग्रेस सरकार थी और स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस योजना के लिए 60 करोड रााशि स्वीकृत करा दी।

इस योजना में 80 प्रतिशत पैसा केन्द्र ने दे दिया और 10 प्रतिशत राज्य को देना था और 10 प्रतिशत नपा को देना इस योजना के टेंडर समय से नही हो पाए और इसकी लागत बढकर 80 करोड हो गई और इस योजना को पीपीपी की ओर मोड दिए और टेंडर करवा दिए।

यह योजना लागू हुई जब केन्द्र में कांग्रेस और राज्य में भाजपा इस कारण इस योजना का श्रेय लेने की होड दोनो दलो के नेताओ मे होड लग गई। इस योजना पर काम करने की रूचि नेताओ ने ना सरकारो ने ना ही नपा ने दिखाई। इसके परिणाम स्वरूप सन 2013 में नेश्नल पार्क में लाईन बिछाने की अनुमति नपा को मिली।

इसके बाद जून 2013 में पेडो के काटने की अनुमति ना लेने के कारण फिर काम रोक दिया गया। फिर एनओसी के चक्कर में यह फाईल सुप्रीम कोर्ट में फस गई और योजना वैलिटिनेटर पर आ गई।

कुल  मिलाकर जब यह योजना शुरू हुई थी तब प्रदेश में भाजपा का शासन था और पिछले पांच साल से नपा भी भाजपा की थी। जनमानस का कहना है कि पिछली नपा का कार्यकाल का भ्रष्टाचार और राज्यशासन की उदासीनता के कारण शहर के कंठ प्यासे के प्यासे है।

पूर्व विधायक माखनलाल राठौर के पूरे पांच साल यह कहते गुजर गए कि अब आऐगा पानी और अब शुरू होगा जलावर्धन का काम,नपाध्यक्ष तो कुछ कहती ही नही थी उनके पति ही कहते थे, हो रही है बात, आऐगा पानी और यशोधरा राजे

सिंधिया बार-बार मीटिगों के प्रेस नोट प्रेस को जारी कर रही है हो गई बैठक जल्द शुरू होगा काम,काम तो छोडो कंपनी ही भाग गई नपा ने जबरियां दोशियान के ऑफीस मे ताले लटकवाए कम से कम इज्जत जो बची रहे।

ऊपर से इस योजना पर भाजपा शासित नपा के कार्यकाल में 14 करोड का घोटाला भी सामने आ गया है जिससे जनता अपना हक लेने स्वयं ही सडको पर आ गई है। कितना अजीब लगता है कि प्रदेश कैबीनेट की  ताकतवर मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के विधान सभा में पीने के पानी के लिए जनता सत्याग्रह कर रही है।

ऊपर से पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा रणवीर रावत ने प्रेस में बयान पटक दिया कि आंदोलन से क्या होगा,इस बयान से जनता का दिल जल गया और वह कूंद गई पब्लिक पार्लियामेंट के इस जलक्रांति सत्याग्रह में। इस जलकं्राति को कांग्रेस ने यह कहकर समर्थन कर दिया कि भाजपा भी समर्थन दे और वह राजनीति ना करे तो वह भाजपा के नेताओ का नागरिक अभिनंदन करेगी।

लेकिन कांग्रेस की इस पत्रकार वार्ता का भाजपा की ओर से कोई बयान नही आया है जैसे जैसे इस सत्याग्रह के दिन बढते जा रहे है लोग भाजपा को कोसते नजर आ रहे है।  कंाग्रेसीयों ने तो समर्थन दे दिया है इस जलक्रांति में,  परन्तु भाजपाई नजर नही आ रहे है।

इस आंदोलन को अभी तक 40 विभिन्न संगठनो का समर्थन मिल चुका है ईतना ही नही इस मंच को किन्नर भी अपना समर्थन दे चुके है। परन्तु भाजपा की एक चिडियां भी इस मंच की ओर नही गई है कुछ करो भाजपाईयो अपने वादो का,नही तो हम मान लेगें कि इस भरी गर्मी में भी जम गया भाजपा नेताओ का खून............ 
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