सिंध के सबसे बडे खलनायक शरद गौड के बदले स्वर: पढिए क्या कहा

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। शिवपुरी में सिंध नदी का पानी अभी तक न आ पाने के लिए जलक्रांति के सत्याग्रहियों ने एक तरह से माधव राष्ट्रीय उद्यान के संचालक शरद गौड को जनता की नजर में खलनायक घोषित कर उनका पुतला फूंक दिया था।

जनता का गुस्सा इतना प्रबल था कि पुतला फूंके जाने के पूर्व सैंकड़ों लोगों ने लातें और घूंसे मारकर पुतले को तार तार कर दिया था। इसके बाद अब माधव राष्ट्रीय उद्यान के संचालक शरद गौड के स्वर बदल गये हैं।

अभी तक चुप्पी साधे बैठे श्री गौड ने प्रेस बयान जारी कर अपने आपको निर्दोष घोषित करने का प्रयास किया गया है। अब उन्हें समझ में आ रही है कि सिंध जलावर्धन योजना जनहित की योजना है और उनके बदले हुए स्वर देखिये कि इस योजना में मैंने कभी अड़ंगा नहीं लगाया।

बल्कि जनहित की योजना होने के कारण स्वयं पहल कर पुनरीक्षित प्रस्ताव तैयार कराकर भेजा। घबराये शरद गौड अब यह कहने से भी नहीं हिचक रहे हैं कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट से पेड़ काटने की अनुमति मिल जायेगी।

जनता के दबाव का ही परिणाम है कि अपने आपको शासन प्रशासन और जनता से ऊपर मानने वाले शरद गौड को जमीनी हकीकत दिखाई देने लगी है। नियमों की आड़ में उन्होंने योजना पर रोक लगाई। निश्चितौर पर उनका यह कृत्य ठीक होता यदि राष्ट्रीय उद्यान में सबकुछ ठीकठाक चल रहा होता।

उनके कार्यकाल में नेशनल पार्क से बेतहाशा पेड़ों की कटाई हुई है  जिसे  रोकने के लिए उन्होंने कभी कोई पहल नहीं की। लेकिन सिंध जलावर्धन योजना में रोक के लिए वह दोषारोपण नगरपालिका पर थोप रहे हैं।

श्री गौड द्वारा जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि नगरपालिका से प्राप्त प्रस्ताव फरवरी 2010 में अनुमति हेतु प्रेषित किये गये थे जिसमें नगरपालिका ने कोई वृक्ष न काटे जाने का वचन पत्र प्रस्तुत किया था लेकिन 134 वृक्ष उखाड़े जाने से सर्वोच्च न्यायालय की शर्तों का उल्लंघन हुआ जिसके फलस्वरूप 11 जून 2013 से कार्य पर रोक लगा दी गई।

अपना बचाव करते हुए श्री गौड ने कहा है कि माधव राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा  वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण संबंधी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया है और इस योजना में कभी कोई रोड़ा नहीं अटकाया।

जनहित की योजना होने के कारण शेष कार्य के दौरान काटे जाने वाले 470 वृक्षों की गणना कराई गई और इन वृक्षों को काटने की अनुमति हेतु पुनरीक्षित प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया। जिसका राज्य वन्य प्राणी बोर्ड और राष्ट्रीय वन्यप्राणी बोर्ड की बैठक में अनुमोदन किया जा चुका है।

इसके बाद अब सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति मिलना शेष है। श्री गौड ने यह भी कहा कि वर्तमान में उक्त योजना की अनुमति से संबंधित कोई कार्यवाही माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी में लंबित नहीं है।

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