में शिवपुरी हूॅ, यहां नेतागिरी नही बल्कि चमचागिरी होती है

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। में शिवपुरी हुॅं,आजादी के 68 साल बाद ाी शिवपुरी पानी, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूल ाूत समस्याओं से जूझ रहा है तो इसके मूल में सबसे अहम भूमिका यहां की राजनीति की है। यहां की बंजर भूमि में ऐसा कोई राजनैतिक नेतृत्व विकसित नहीं हो सका जिसने जनता की आवाज के साथ अपनी आवाज मिलाई हो। 

में शिवपरी हुॅ, यहां कोई नेता पैदा नही हुआ है सिर्फ सिंधिया राजवंश के प्रभाव तले यहां सुविधाभोगी और अपने हित संचालित करने वाले राजनीतिज्ञों की ारमार रही है जिससे शिवपुरी की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। मौके-मौके पर इक्का-दुक्का राजनैतिज्ञ अवश्य सामने आते रहे हैं, लेकिन उनकी धार कुछ समय पश्चात भौंथरी होती रही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों पर यहां नूराकुश्ती करने का आरोप है। विपक्ष की भूमिका का निर्वहन न तो कांग्रेस और न ही भाजपा ने किया। 

में शिवपरी हुॅ, मध्यप्रदेश के 51 जिलों में से यह पहला जिल होगा जिसके वाङ्क्षशदें मलमुत्र युक्त पानी पी रहे है, यहां पानी की समस्या नही मिटी है केवल नेताओ के वादे ही वादे मिले है। कई चुनाव सिंध के पानी के नारो के साथ हो गए और सबसे बडी बात इस शहर की जलस सया पर देश के प्रधानमंत्री भी स्थानीय गांधीपार्क में भाषण दे चुके है। 


में शिवपुरी हूुॅ प्रदेश में सबसे खराब सड़कें इस जिले में हैं और बिजली संकट से भी यह जिला बुरी तरह जूझ रहा है। स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं ाी इस जिले में विकसित नहीं हो पाईं। लगभग 20 साल पहले तत्कालीन मु यमंत्री दिग्विजय सिंह ने समाजसेवी संस्था रोटरी क्लब के सौजन्य से जिला अस्पताल में निर्मित आईसीयू यूनिट का उद्घाटन किया था और उस समय अपने भाषण में कहा था कि शिवपुरी के आईसीयू को सर्वसुविधा संपन्न किया जायेगा, लेकिन हुआ कुछ नहीं। स्वास्थ्य में मामूली सी गड़बड़ी होने पर ही यहां चिकित्सकों द्वारा मरीज को ग्वालियर रैफर कर दिया जाता है। 

में शिवपुरी हुॅ शिक्षा के क्षेत्र में भी यह जिला अभी तक पिछड़ा हुआ है। मेडीकल और इंजीनियरिंग कॉलेज की स्वीकृति पर शिवपुरी में काफी जश्न मना था, लेकिन अब ऐसा लगता है कि न तो शिवपुरी में मेडीकल कॉलेज और न ही इंजीनियरिंग कॉलेज खुलेगा। आश्चर्य की बात तो यह है कि इसके बाद भी शिवपुरी में कोई आवाज नहीं उठती। 

में शिवपुरी हुॅ, यह की जनता मन मसोसकर रह जाती है। कांग्रेस और न ही भाजपा का कोई नेता जनसमस्या के निदान के लिये सामने आता है। राजनैतिक शून्यता होने के कारण इस क्षेत्र के लोग न केवल उपेक्षित हैं, बल्कि शोषण के शिकार भी हो रहे हैं। शिवपुरी में कथित अफसरशाही द्वारा जनता का शोषण किया जाता है और कोई आवाज मुखर नहीं होती। ऐसी स्थिति में बड़ा सवाल यह है कि शिवपुरी की जनता कहां जाकर अपने दुखों का रोना रोये या फिर उसे इस इलाके से पलायन करने का निर्णय लेना होगा। 

में शिवपुरी हुॅ कोई भी नेता यहां जनता की आवाज के साथ अपनी आवाज नही उठा पाते यहां जनहित की नेतागिरी नही होती बल्कि स्वयं हित की नेतागिरी होती है। यह नेता नही चमचे है और चरणचु बन की राजनीति की पर परा है यहां पर
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