धन्य हुई शिवपुरी की धरा, जैनमुनि ने ली समाधि

shailendra gupta
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शिवपुरी। शिवपुरी के जैन धर्म के अनुयाईयो के लिए आज का दिन किसी त्यौहार से कम नही रहा है। 84 वर्षीय दिगम्बर जैन मुनि ने जैन मुनियो के सिद्धांतों पर चलते हुए निर्विकल रूप से सदर बाजार स्थित चन्द्र प्रभु जिनालय मंदिर में आज रात में समाधि ली।


दिन-रात मेेरे स्वामी में भावना यह भाऊ देहांत के समय मैं तुमको न भूल पाऊं। आलोचना पाठ की ये पंक्तियां बुधवार-गुरूवार की दरम्यानी रात तब साकार होती दिखी जब मुनिश्री सौम्य सागर महाराज ने णमोकार महामंत्र का जाप करते हुये समाधी मरण ले लिया।

मुनिश्री का अंतिम संस्कार हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में अतिशय क्षेत्र शांतिनाथ जैन मंदिर सेसई के प्रांगण में किया गया।

शास्त्रो में कहा गया है कि भक्त को भगवान की मिलन की आस का अहसास पूर्व ही हो जाता है यही अहसास 84 वर्षीय मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज को बुधवार-गुरूवार की रात 9:30 पर हो गया।

मुनिश्री रात 9:30 बजे से ही पदमासन की बैठ गए और मुनिश्री महाराज ने मुस्कराते हुए और णमोकारी मंत्र का जाप करते हुए रात में ही लगभग तकरीबन 1:05 मिनट पर 84 वर्षीय मुनि श्री सौ य सागर जी महाराज ने नश्वर देह का त्याग कर दिया और फि र जैसे ही यह समाचार श्रद्धालुओं का लगा तो मध्य रात्रि से ही श्रद्धालुओं का ताता  चन्द्र प्रभू जिनालय में मुनिश्री के अंतिम दर्शनार्थ को निकल पडा।

आचार्य चन्द्र सागर महाराज के शिष्य मुनि सौ य सागर महाराज ने तकरीबन 8 माह पूर्व ही मुनि दीक्षा ली थी और इससे पूर्व में तकरीबन 9 वर्षों तक छुल्लक अवस्था में धर्म साधना करते रहे।

पदमासन मुद्रा में निकली अंतिम यात्रा


जैन दर्शन में ऐसी मान्यता है कि जब भी किसी मुनि का समाधी मरण होता है तो उन्हें आसन पर लिटाकर नहीं वरन् पदमासन मुद्रा में पालकी में सजाकर ले जाया जाता है यही कारण है कि मुनिश्री सौ य सागर की समाधि उपरांत उनकी नश्वर देह का अंतिम संस्कार करने के लिये उन्हें विमान में बैठाकर अंतिम यात्रा निकाली गयी।

जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुयी अतिशय क्षेत्र सेसई सडक पहुंची जहां शांतिनाथ जैन मंदिर के प्रांगण में विभिन्न क्रियाओं के बीच मुनिश्री का अंतिम संस्कार किया गया।

14 किमी लंबी अंतिम यात्रा में आचार्य संघ भी शामिल


आचार्य चन्द्र सागर जी महाराज, मुनि सरल सागर जी, आर्यिका सिद्धिमति, छुल्लिका करूणामति, छुल्लिका रिद्धिमति, माताजी जहां समाधिस्थ मुनि की अंतिम यात्रा में शामिल रहे वरन् हजारों श्रद्धालुओं ने मुनिश्री के चरणों में श्रीफल समर्पित कर अपनी विनम्र श्रद्धांजली व्यक्त की।

शिवपुरी से सेसई तक की दूरी 14 किमी की है और इस दूरी को पद बिहार करते हुये साधुओं के साथ-साथ श्रावकों ने भी पूरा किया।

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