महर्षि दयानन्द को समझने में लोगों ने भारी भूल की, वैदिक संस्थान द्वारा मनाया गया ऋषि बोध उत्सव

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शिवपुरी। गत दिवस स्वामी दयानन्द का ऋषि बोध उत्सव(शिवरात्रि पर्व)पर भव्य तरीके से वैदिक संस्थान द्वारा साईं मंदिर पानी की टंकी के पीछे मनाया गया। ऋषि बोध उत्सव के अवसर पर वैदिक संस्थान द्वारा यज्ञ का भी आयोजन किया गया।

जिसमें वैदिक संस्थान के आचार्य योगेश जी द्वारा ध्यान, उपासना के साथ यज्ञ संपन्न कराया गया। इस कार्यक्रम में पधारे आर्य समाज के विद्वान एवं वैदिक संस्थान के संरक्षक लखवीर सिंह राणा ने स्वामी दयानन्द सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डाला कि महर्षि दयानन्द को समझने में लोगों ने भारी भूल की है।

बहुत से व्यक्तियों को यह भ्रम है कि ऋषि दयानन्द केवल एक समाज सुधारक थे उन्होंने समाज में फैली रूढिय़ों और पाखण्डों का खण्डन किया और बस, परन्तु वस्तुत: देखा जाए तो समाज सुधार तो स्वाजी  के कार्य का एक लेशमात्र था असल में उनका जीवन तो सर्वतोमुखी था।

उन्होंने सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक, दार्शनिक, शैक्षणिक और नैतिक सभी क्षेत्रों में काम किया। स्वामी दयानन्द तत्वदर्शी एवं परोक्षदर्शी थे वे आध्यात्मिक विद्या के धनी और उच्चकोटि के योगी थी।

इसीलिए महाशिवरात्रि पर्व पर स्वामी दयानन्द के जीवन पर आधारित ऋषि बोध उत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर महेन्द्र रावत ने शिव अर्थात् जो कल्याणकारी है जो अनन्त अनादि चेतन तत्व है उस पर संक्षिप्त विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन वैदिक संस्थान के उमेश शर्मा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का मु य उद्देश्य वेद की वाणी एवं ऋषि दयानन्द के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। इस कार्यक्रम में वैदिक संस्थान के प्रमोद मिश्रा, अतुल शर्मा, प्रतीक शिवहरे, शिवा पाराशर, डॉ.अतुल भार्गव, मुकेश बंसल, महेश शर्मा, ध्रुव उपमन्यु, रामपाल सोनी, शेरसिंह यादव आदि मौजूद थे।

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