शिवपुरी की कुंडली पर शनीचर बनकर बैठा है वनविभाग

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शिवपुरी। शायद शिवपुरी के विकास पर एनओसी का ग्रहण लग गया है, आज से पांच वर्ष पूर्व स्वीकृत देवास-इंदौर फोरलेन प्रोजेक्ट को भी वनविभाग ने अभी एनओसी जारी नही की है। इस कारण ग्वालियर से शिवपुरी की 125 किमी की सड़क के निर्माण कार्य का श्रीगणेश भी नही हो पा रहा है।

वर्ष 2009 में फोरलेन सड़क के रूप मे इसके लिए विस्तारीकरण की स्वीकृति मिली थी लेकिन पूरे पांच साल गुजर जाने के बाद भी इस भारी भरकम प्रोजेक्ट पर काम शुरू नही हो पा रहा है। ग्वालियर से शिवपुरी के लिए आने जाने के रास्ते को सुगम बनाने वाले प्रोजेक्ट में अडग़े कम नही हो पा रहे है।

इस प्रोजेक्ट मे मुआवजा आवटंन, सर्वे सहित अधिकांश कार्य पूरे हो चुके है,लेकिन प्रोजेक्ट के शुरू होने में वन विभाग व नेशनल पार्क क्षेत्र की एनओसी का अडग़ा अब भी यथावत है। यह बताना होगा कि ग्वालियर -शिवपुरी फोरलेन निर्माण के दौरान 80 हेक्टेयर वन क्षेत्र में कार्य होना है तो वहीं 15 हैक्टेयर क्षेत्र माधव नेशनल पार्क के अंतर्गत वाइल्ड लाइफ जोन में आता है इन दोनो क्षेत्रो में कार्य के लिए वन व वाइल्ड लाइफ की एनओसी

बेहद आवशयक है
एनएचए आई के अधिकारियो की माने तो वन वन क्षेत्र में 80 हैक्टैयर क्षेत्र में फोरलेन निर्माण की फस्र्ट फेज की स्वीकृति प्राप्त हो गई है लेकिन स्कैंड व फायनल अनुमति मिलना बाकी है, जो की प्रक्रियाधीन है। इसके साथ ही नेशनल पार्क की करीब 5 किलोमीटर की स्वीकृति भी मिलना अभी बाकी है।

जहां ग्वालियर-शिवपुरी फोरलेन निर्माण प्रोजेक्ट तमाम तैयारियो के बाबजूद भी एनओसीओ के चक्कर में फंसा हुआ है। और वही शिवपुरी-देवास फोरलेन प्रोजेक्ट भी सकट के बादल मंडरा रहे है। इस कार्य को लेने वाली जेवीके कंपनी ने कार्य के लेटलतीफी के चलते लागत बढ जाने के कारण ठैका निरस्त करने की मांग दिल्ली हाईकोर्ट मेें की थी। दो साल तक यह मामला हाईकोर्ट मेें विचाराधीन रहा था इसके बाद हाईकोर्ट ने कंपनी और एनएचए आई की आपसी सहमति से निवटाने के आदेश दिए थे परंतु आज तक कोई निकारण नही निकला है।

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