प्यासे कंठों ने नहीं दिया सिंधिया को आशीर्वाद

shailendra gupta
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त्वरित टिप्पणी/ललित मुदगल/शिवपुरी। देश में लोकसभा चुनाव के नतीजो में एग्जिट पोलो की भविष्यवाणी सत्य हुई है। शिवपुरी-गुना लोक सभा सीट पर एक चैनल ने भी दावा किया था कि सिंधिया यह चुनाव हार सकते है। नतीजा पलट आया सिंधिया चुनाव तो जीते परन्तु दो विधान सभा अवश्य हार गये। शिवपुरी और गुना विधानसभाओ मे सिंधिया बडे अंतर से हारे है। ऐसा क्यो, प्रश्र खडा है उत्तर के लिए, आएये मंथन करते है सिंधिया की दो विधान सभाओ की करारी हार का।

सिंधिया ने शिवपुरी को चार कॉलेज, जलावर्धन योजना, सीवर प्रोजेक्ट ओर कई प्रोजेक्ट शहर को दिए है। सिंधिया के मेंडिकल कॉलेज की चर्चा इस पूरे लोकसभा में रही स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता सहित प्रदेश के मुखिया शिवराज और देश के भावी प्रधानमंत्री मोदी तक ने इस प्रोजेक्ट को झूठा बाताया। इतना ही सिंधिया द्वारा लाई गई, शहर की लाईफ लाईन कही जाने वाली योजना जनावर्धन योजना का भी श्रेय भी भाजपा लेने कही भी पीछे नही रही है।

पहला कारण जिस गाति से सिंधिया ने योजनाए शहर को दी उस गाति से क्रियावयन ना हो पाया। जिस सिंधिया को विकास पुरूष का तमगा दिया जाना चाहिए था उसे शिलान्यास वीर का दर्जा मिल गया। यह सब हुआ प्रदेश मे भाजपा के शासन के कारण ओर टीम सिंधिया के कारण। टीम सिंधिया के पास ऐसे चेहरे है जिन्है पोस्टर छाप नेता कहै तो कोई अतोशोयक्ति नही होगी। सिंधिया के साथ बैनर पोस्टर पर दिखाई देने के अतिरिक्त कोई वार्किगं नही है।

टीम सिंधिया , सिंधिया की योजनाओ को फॉलो नही कर पाई, सब सिंधिया के भरोसे ही छोड देना ही इस चुनाव में शिवपुरी विधानसभा की करारी हार का कारण है। दूसरा कारण पूरे लोक सभा चुनाव में भाजपा पुरे दम सेे सिंधिया के प्रोजेक्टो को झूठा बताया।  उतनी ही अक्रमकता से जबाब ना दे पाना टीम सिंधिया की कमी रही।

तीसरा कारण जलावर्धन योजना रही है शहर के प्यासो कंठो को सिंधिया की ओर से पानी जल्द आने का आश्वासन ही बरसता रहा और  प्यासे कंठ रह गये , रीते रह गये घड़े और फिर मतदाताओ ने सिंधिया की मतपेटी भी रिती कर दी। रही कसर भाजपा ने पूरी कर दी कि केन्द्र से एनओसी नही मिलने के कारण जलावर्धन योजना का काम नही हो पा रहा है। और सारा ठीकरा सिंधिया के सर पर फोड दिया, सालो बाद एनओसी आई तो योजना नेशनल पार्क के चक्कर में फस गई, कांग्रेसी कही भी जनता को नही समझा पाए की योजना का क्रियान्वयन क्यो नही हो पा रहा है।

चौथा कारण सिंधिया के खिलाफ टीम सिंधिया ने ही काम किया है। इस कारण ही कई पदाधिकारियो के पॉलिंग बूथो पर सिंधिया की करारी हार हुई है। सांसद प्रतिनिधियो की पॉलिंग बूथो से भी सिंधिया की हार हुई है। ये सांसद प्रतिनिधि वही है जिन्है सिंधिया ने अपनी ओर से चुना था इस चुनाव ही नही पुरे कार्यकाल में ये कही भी जनता के हक में लडते नजर नही आये बस अपनी गाडीओ पर  सांसद प्रतिनिधि की प्लेट लगाकर जनता में सिंधिया के नाम पर नेतागिरी करते नजर आये।

पॉचवा कारण शहरी क्षेत्र में इंटरनेट का ज्यादा यूज होना ओर इस बार यूथ मतदाता ने भी अपनी सक्रियता इस चुनाव में दिखाई है। शिवपुरी में क्या पूरे देश में कांग्रेस भाजपा से नेट प्रचार मेें कोसो दूर थी और नेट पर केवल नमो का कब्जा था। और हां यूथ आश्वासन नही रिजल्ट चाहता है।

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