अब लो अपने महाराज, ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हो गए भू-माफिया!

shailendra gupta
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राजू (ग्वाल) यादव/शिवपुरी। लोकसभा चुनावों में कांगे्रस पार्टी की क्या दुर्गति हुई है यह तो सभी जानते है लेकिन इस दुर्गति में अपने आप को बचाने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री और नव निर्वाचित सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को ऐसा क्या हो गया कि उनके खिलाफ भोपाल में आर्थिक अपराध के तहत मामला पंजीबद्ध किया जाकर ग्वालियर शाखा को भेजा गया है। सुना जा रहा है कि ट्रस्टों की सिंधिया द्वारा बेचा गया है जो जमीन शासकीय थी तो उन्हें लोक ट्रस्ट द्वारा विक्रय की भूमियों की अब जांच होगी और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही भी होना तय है।

ग्वालियर से प्रकाशित एक सांध्य दैनिक अखबार ने बेबाकी से अपनी बात रखते हुए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर गंभीर आरोप लगाए है। जिसमें बताया जाता है कि ताजातरीन मामले में कांग्रेस के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर जो आरोप लगा है उसमें महलगांव के सर्वे क्रमांक 394,395,916,1212 की शासकीय भूमि शामिल है। ऐसे में यह मामला अब जांच का विषय बन गया है। इस पूरे मामले में सिंधिया  महल द्वारा शासकीय भूमियों को खुर्द-बुर्द करने की बात सामने आई है।  

मामले के अनुसार वर्ष 1993 से लेकर 1999 तक महल के आसपास की तमाम स पत्तियों को या तो फर्जीवाड़ा करके विक्रय कर दिया गया या उन स पत्तियों पर जिनकों विक्रय नहीं किया जा सकता था, उनमें मैरिज गार्डन खोल दिए गए। अपने को जनता का मसीहा कहलाने वाले सिंधियापरिवार ने इन स पत्तियों को खुर्द-बुर्द करके अपनी जेबें भर ली है। मामला यहीं तक नहीं रूका बल्कि मामले में महल, महजल के सिपाहसलार व दलालोंं ने भी जमकर मलाई चाटी है। 

इस मामले में गोला महलगांव जिसमें लगभग सिंधिया का पूरा क्षेत्र आता है जिसमें फूलबाग, पड़ाव, जीवाजी क्लब, चेतकपुरी, चेतकपुरी के सामने का गढ्ढा, सिटी सेन्टर, माधवनगर, विवेकनगर आदि। सन् 1948 के मर्जर एग्रीमेंट में यह स्पष्ट उल्लेख है कि कौन-कौन सी स पत्तियां, महल की है कौन सी स पत्तियां मप्र शासन के निहित है तथा कौन-सी स पत्तियां केन्द्र सरकार को समाहित की गई। इसके उपांत भी प्रदेश शासन के अधिकारियोंने महाराज के राजाओं और ट्रस्टों के नाम फर्जी नामांतरण करा दिए गए। 

जनचर्चाओं में उड़ती आ रही खबरों में बताया जाता है कि श्री सिंधिया कहीं लोकसभा में मिली करारी हार के बाद भाजपा सरकार  की किसी साजिश का शिकार तो नहीं हो रहे। हालांकि सिंधिया समर्थक यह सभी आरोप बेबुनियाद बताते है लेकिन सिंधिया पर जमीन बेचने के इस आरोप ने राजनीति में नया तूफान ला दिया है। आर्थिक अपराध शाखा में मामला दर्ज होना एक बड़ी बात है और यदि मामले की निष्पक्षता से जांच की गई तो कहीं श्री सिंधिया को यह भारी ना पड़ जाए। 

बताना मुनासिब होगा कि पूर्व में भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर शासकीय भूमि हड़पने के आरोप लगाए थे। जिसमें छत्री परिसर से गुजरी लोक निर्माण विभाग की सड़क को भी अपने कब्जे में लेने का आरोप लगाया।  इसके बाद भी श्री झा अपने बयान पर कायम है और एक ना एक दिन वह बड़ा खुलाास करेंगें। इस बात के संकेत वह अभी कुछ दिनों पहले शिवपुरी आगमन पर दे गए थे।


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