शिवपुरी। गुना शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के मजबूत प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया को घेरने के लिए भाजपा अपने तरकस के हर तीर का इस्तेमाल कर रही है और चुनाव जीतने के लिए वह कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती। भाजपा ने कांग्रेस के इस मजबूत गढ़ को ध्वस्त करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
भाजपा प्रत्याशी जयभान सिंह पवैया से लेकर पार्टी के महल विरोधी कार्यकर्ता और पार्टी आला कमान ने सिंधिया के खिलाफ जबरदस्त व्यूह रचना रच दी है। एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उ मीदवार नरेन्द्र मोदी जहां भाजपा का माहौल बनाने के लिए जिला मु यालय शिवपुरी में 5 अप्रैल को आमसभा को संबोधित करने आ रहे हैं वहीं साध्वी उमा भारती और मु यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की दस्तक भी संसदीय क्षेत्र में शुरू हो गई है। जबकि कांग्रेस की ओर से अकेले ज्योतिरादित्य सिंधिया ही जूझ रहे हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता मुंह दिखाई की रश्म अदा कर रहे हैं और बाहरी चुनाव प्रभारी कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में लाख टके का सवाल यह है कि क्या मोदी लहर में संसदीय क्षेत्र में एक नए इतिहास का सृजन होगा?
गुना शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में इस बार लगभग 4 लाख युवा मतदाताओं की सं या विगत चुनाव की तुलना में बढ़ी है। इस बार लगभग 16 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। भाजपा का जोर इन चार लाख मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में हैं। भाजपा के चुनाव प्रभारी नरेन्द्र बिरथरे का दावा है कि मोदी लहर में इन मतदाताओं का झुकाव भाजपा की ओर होगा। जबकि कांग्रेसी इसे नहीं मानते। उनके अनुसार युवा वर्ग में सिंधिया की छवि अच्छी है और संसदीय क्षेत्र में विकास कराकर उन्होंने अपनी निजी पहचान भी विकसित की है। कांग्रेस जहां इस चुनाव में विकास एजेण्डे को साथ लेकर मैदान में हैं।
वहीं भाजपा सामंतवाद को मु य चुनावी मुद्दा बना रही है। भाजपा का जोर इस बात पर भी है कि नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए यहां से पवैया की जीत अत्यंत आवश्यक है। भाजपा ने इस संसदीय क्षेत्र में प्रचार कुछ देरी से किया, लेकिन देरी से प्रचार शुरू करने के बाद भी भाजपा के प्रचार अभियान ने गति पकड़ ली है। कांग्रेस और भाजपा के महल विरोधियों का एकजुट होना भी कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए सिर दर्द बन रहा है। भाजपा के महल विरोधी कार्यकर्ता महल को नेस्तनाबूत करने के लिए इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहते और पवैया भी आक्रामक अंदाज से चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि कांग्रेस में प्रचार अभियान का दारोमदार सिर्फ और सिर्फ सिंधिया पर केन्द्रित है। वह अकेले ही अपनी दम पर भाजपा के प्रहारों की काट कर रहे हैं।
लेकिन भाजपा की दिक्कत यह है कि सिंधिया के निजी आभामण्डल को वह कैसे धोये यह उसे समझ नहीं आ रहा। प्रचार में सिंधिया शालीन और संयमित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। अपने पर लगे सामंतवादी होने के आरोपों का भी वह पुरजोर तरीके से खण्डन कर रहे हैं। सिंधिया कटाक्ष करते हैं कि सामंतवाद के मुद्दे पर भाजपा के दोहरे मापदण्ड हैं। भाजपा को मेरी दादी और दोनों बुआओं में सामंतवाद नहीं दिखता। सामंतवाद को मुद्दा बनाने का असर भी दिखने लगा है। सिंधिया के पोस्टरों में अब श्रीमंत और महाराज का इस्तेमाल कम हुआ है। कांग्रेस के किसी अन्य बड़े नेता की सभा संसदीय क्षेत्र में नहीं हुई और होने की उ मीद भी नहीं है। जबकि भाजपा नरेन्द्र मोदी की सभा के अलावा संसदीय क्षेत्र में मु यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की 8 सभाएं और साध्वी उमा भारती की 5 सभाएं करा रही है। आज शिवराज सिंह चौहान की जहां मुंगावली में सभा है वहीं साध्वी उमा भारती चंदेरी में जयभान सिंह पवैया के पक्ष में आमसभा कर रही हैं। कुल मिलाकर चुनाव काफी रोचक होता जा रहा है।
पवैया के दोनों हाथों में लड्डू
भाजपा हलकों में इन दिनों चर्चाएं चल रही हैं कि सिंधिया से मुकाबला करने में किसी भी सूरत में जयभान सिंह पवैया को नुकसान नहीं है। वह जीते तो और हारे तो दोनों स्थितियां उनके लिए फायदेमंद हैं। भाजपा के स्थानीय बड़े नेता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि वह जीते तो एनडीए के सत्ता में आने पर वह मंत्री बनेंगे और हारे तो प्रदेश में मंत्री बनना तय है।