पावन प्रज्ञापुराण कथा के आखिरी दिन हुआ पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण कार्यक्रम

shailendra gupta
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शिवपुरी। अगले वर्षों में युद्ध, हथियारों से नहीं विचारों की विचारों से काट कर लड़े जाएंगे। जिससे विचारों के परिष्कार के साथ युग परिवर्तन होगा। प्राचीन काल की धर्मतंत्र से लोक शिक्षण की रीति नीति ने युग परिवर्तन किए हैं।
यह बात 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ आयोजन समिति के सदस्य डॉ पीके खरे ने प्रज्ञापुराण कथा के समापन अवसर पर कही। गौरतलब है कि गायत्री महायज्ञ का आयोजन 6 फरवरी से कमलागंज पुल स्थित मां गायत्री परिसर पर आयोजित किया जा रहा था। रविवार को यहां पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी लोगों ने परिवार सहित शामिल हुए और पूर्णाहुति संस्कार भी किया। 

कार्यक्रम स्थल पर गायत्री तीर्थ शांति कुंज हरिद्धार की पधारी ब्रह्नवादिनी बहिनों सुशीला ओन्हरे, रामेश्वर साहू, प्रतिभा पटेल एवं मीना ने संगीतमयी प्रज्ञा पुराण कथा दूरदराज क्षेत्रों से पधारे जनमानस को अपने विचारों से झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी खुशी एवं सुख के लिए किया गया व्यक्ति का हर कार्य यदि दूसरों को सत्त सुख प्रदान करता है, यही देवत्व का आधार है। 

स्वार्थवश दूसरों के दुख भावनाओं की चिंता किए बिना किया गया कार्य आसुरी वृत्ति होती है, जो कभी सुख प्रदान नहीं करा सकती। जिस प्रकार चंदन का वृक्ष सौ वर्ष तक खड़े रहकर एवं कटने के बाद 100 वर्ष तक अपना सुंगध एवं शीतलता मानवों एवं देवों के मस्तिष्क पर शोभायमान होता है। उसी प्रकार व्यक्ति के सत्कर्म जीवनपर्यन्त मनुष्य को सामाजिक सम्मान प्रदान कराते हैं। कार्यक्रम में शिक्षाविद् मधुसूदन चौबे, प्रोफेसर डॉ एलडी गुप्ता, महिला सशक्तिकरण  अधिकारी ओपी पाण्डे, तहसीलदार आरपी पाण्डे, नायब तहसीलदार मनीष जैन, चिंतक एवं विचारक डॉ आरके श्रीवास्तव शामिल हुए।

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