गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा क्यों करते हैं

shailendra gupta
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शिवपुरी। भगवान की भक्ति करने वाले भक्तों की शक्ति से ही वह ऊर्जावान होते है श्रीमद् भागवत कथा में बताया है कि जब भगवान ने गोवर्धन पर्वत को ऊंगली पर उठाया था तब भक्तों की शक्ति, बृज की लीलाऐं और गोपियों का प्रेम इन्हीं सब से प्रभु को ऊर्जा मिली और उन्होंने ऊंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाया, इसलिए हम घर-घर गोवर्धन पूजते है ताकि ईश्वर की ऊर्जाशक्ति हम पर भी इसी तरह बनी रहे।
गोवर्धन पूजन का यह महत्व बता रहे थे आचार्य डॉ.गिरीश जी महाराज ने जो स्थानीय श्री बांकड़े हनुमान मंदिर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को अवगत करा रहे थे। इस अवसर पर गोवर्धन परिक्रमा स्वरूप झांकी भी कथा स्थल पर लगाई गई। कथा में आगे श्रीकृष्ण रूकमणी विवाह और तुलसी विवाह का वाचन किया जाएगा। 

शहर के प्राचीन स्थल श्री बांकड़े हनुमान मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा के माध्यम से आचार्य डॉ.गिरीश जी महाराज ने आज भगवान का बाल चरित्र का बखान किया और गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व व उससे मिलने वाले फल के बारे में भी बताया साथ ही कंस वध एवं रूकमणि मंगल विवाह का वर्णन भी किया गया। कथा में गोवर्धन पूजा उत्सव का सौभाग्य श्रीमती सुनीता-हरिशंकर दुबे व श्रीरूकमणी विवाह कथा का सौभाग्य श्रीमती रामप्यारी-माखन लाल राठौर ने प्राप्त किया। 

कथा के प्रसंग में आज भगवान के बाल चरित्र का वर्णन किया गया साथ ही गोवर्धन पूजा का भी विशेष महत्व बताया और श्रीकृष्ण रूकमणी मंगल विवाह का वर्णन सुनाया गया जहां फूल वर्षा के साथ ख्ुाशियां मनाई गई। यहां गोवर्धन पूजन भी मुख्य यजमान द्वारा कराया गया। 

इस अवसर पर अन्य श्रद्धालुओं ने भी पूजा-अर्चन को जाना और समझा, पं.दिनेशचन्द्र शास्त्री ने सभी धर्मप्रेमीजनों से मिलकर गोवर्धन पूजा कराई और संगीत की सुमधुर लहरियों पर पाण्डाल गुंजायमान नजर आया। इन्हीं व्याख्याओं के साथ कथा के अंत में बृज की होली खेली जा रही थी सभी श्रोतागण होली खेलने में मशगूल थे ओर प्रभु की भक्ति में लीन दिखाई दे रहे थे। पूरा पाण्डाल श्रीकृष्ण की लीलाओं से सजा हुआ नजर आ रहा था। जैसे-जैसे कथा समापन की ओर आ रही है वैसे-वैसे श्रद्धालुगणों की संख्या बढ़ती जा रही है। 


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