सिंधिया ने बचाई लाज तो औरों ने गिराई अपनी औकात!

shailendra gupta
राजू (ग्वाल)यादव/शिवपुरी- इसे किस्मत कहें या कांग्रेसियों के अथक मेहनत के बाद भी परिणाम ना मिलना क्योंकि अभी-अभी संपन्न हुए विधानसभा चुनाव 2013 में जो परिणाम निकलकर सामने आए उससे मप्र की जनता ने जहां शिवपुरी-गुना संसदीय क्षेत्र के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की लाज रखी है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश के ही बड़े-बड़े नेताओं की औकात गिराने में जनता ने तनिक भी देरी नहीं की यही कारण है कि आज कांग्रेस को फिर से मंथन करना पड़ रहा है कि आखिरकार चूक कहां हुई। इस मामले में सिंधिया का कद घटा नहीं बल्कि सामान्य से बढ़कर ही माना जा सकता है जिन्होंने अपने प्रभाव ने अपने नेताओं को विजयश्री दिलाई।

बात हो रही सिंधिया वर्सेज कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की जिन्होंने अपनी जि मेदारी के बल पर टिकिटों वितरण किया और अपने चहेतों को विजय दिलाने में वह सभी फिसड्डी साबित हुए। जिसमें सुरेश पचौरी तो स्वयं ही हार गए तो वो औरों को कैसे जिताते, बात हो प्रेमचंद गुड्डू की तो वह पार्टी के अन्य नेताओं को तो छोडि़ए अपने बेटे अजीत बौरासी को भी नहीं जिता सके भले ही उन्होंने कुछ भी तिकड़म करके उसे टिकिट दिलवा दिया हो, इसके साथ ही अन्य कांग्रेस के वरिष्ठजन भी है जिनमें सबसे प्रमुख तो पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया है जो अपने संसदीय क्षेत्र में ही विधायकों को नहीं जिता पाए।

ऐसे में अगर कांग्रेस पार्टी की किसी ने लाज बचाई है तो वह है एकमात्र ज्योतिरादित्य सिंधिया जिनके अथक प्रयासों के चलते वह अपने संसदीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि ग्वालियर संभाग में भी अपने चहेतों को टिकिट दिलाने के साथ ही विजयश्री भी दिला गए। जिनमें सर्वाधिक रूप से बमौरी की हार को माना जा सकता है जहां महेन्द्र सिंह सिसौदिया ने सिंधिया की दम पर भाजपा के कद्दावर के.एल.अग्रवाल को मात दी, सिंधिया की खास मानी जाने वाली डबरा से लड़ी इमरती देवी हों या मुंगावली से बड़ी जीत हासिल करने वाले महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा अथवा चंदेरी से भाजपा के कद्दावर भाजपा नेता राव राजकुमार सिंह यादव को करारी मात देने वाले डग्गी राजा सभी ने मिलकर सिंधिया की लाज बचाई और ऐसे महारथियों को धूल चटाई जो भाजपा की शान थे।

बात हो अनूप मिश्रा की तो यहां भी कांग्रेस के लाखन सिंह यादव ने सिंधिया के आर्शीवाद से बड़ी विजय हासिल की। यहां प्रदेश की लगभग 230 विधानसभा सीटों में एक मात्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ही ऐसे निकले जिन्होंने अपने विश्वस्तों को अपनी दम पर टिकिट दिलाया और उन्हें विजयी भी दिलाई हालांकि उनके कुछेक कांग्रेसी इस चुनाव में मात भी खा गए लेकिन इससे सिंधिया का कद घटा नहीं बल्कि बढ़ा है जो अपने संसदीय क्षेत्र में अच्छे खासी दिग्गजों को मात देने में सफल रहे। यदि समय रहते केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अगर सीएम प्रोजेक्ट होते तो परिणाम और भी उलट होते और संभवत: प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता काबिज होने से कोई नहीं रोक पाता।

खैर निकले परिणामों ने प्रदेश की हवा बदल दी और भाजपा सत्ता पर काबिज है बाबजूद इसके केन्द्रीय मंत्री श्री सिंधिया पछतावा नहीं बल्कि चिंतन और समीक्षा पर भरोसा करते है यही कारण है कि आज भी वह ग्वालियर और गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की असीम वर्षा करेंगें और जनता के सहयोग के प्रति कृतज्ञता करने भी जरा सी चूक नहीं करेंगें। फिलवक्त तो हुए चुनावों के परिदृश्य में श्री सिंधिया अपने ही मातहतों के साथ आगामी समय की तैयारी के लिए जुटे है। आगामी समय यानि हम लोकसभा चुनावों की बात कर रहे है।

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