जीव रक्षा के उद्देश्य से होती है चातुर्मास की स्थापना

shailendra gupta
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शिवपुरी-जीव रक्षा के उद्देश्य से जैन संतों द्वारा चातुर्मास किया जाता है। चार माह तक लगातार वह एक ही स्थान पर रहकर धर्मसाधना करते हैं, इसका कारण तो यही है कि बरसात के दिनों में जीव राशि अधिक उत्पन्न होती है अत: विहार के दौरान जीव हिंसा से जैन संत बच सकें और अपने अहिंसा धर्म का पालन करें इसी उद्देश्य के साथ चातुर्मास वर्षाकाल में जैन संतों द्वारा किया जाता है। यह विचार आचार्य सौभाग्य सागर महाराज छत्री जैन मंदिर पर आयोजित वर्षायोग कलश स्थापना के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि प्राणी मात्र की रक्षा करने का संकल्प जैन संतों का होता है और वह पूर्ण रूप से अहिंसाणु व्रत का पालन करते हैं इसीलिए बारिश के समय किसी एक जिनालय या स्थान पर चार माह तक रूककर जैन संतों द्वारा धर्मसाधना की जाती है इस धर्मसाधना के दौरान चातुर्मास स्थली के श्रावक भी संत से जुड़कर धर्ममार्ग पर अग्रसर होते हैं अत: वर्षा योग कलश की स्थापना जहां साधुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं वहीं श्रावकों की साधना का भी यह श्रेष्ठ अवसर है। धर्मसभा में जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुरत्न सागर महाराज ने चार माह तक आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में धर्मप्रेमी बंधुओं से शामिल होकर साधना करने की नसीहत दी। इस अवसर पर मंगलाचरण रामदयाल जैन मावा वालों ने किया जबकि सुनील जैन पोहरी एण्ड पार्टी की सुर लहरियों के बीच श्रद्घालु तीन घंटे तक लगातार जमकर झूमे।

ध्वजारोहण और कलशों की हुई स्थापना

कार्यक्रम के प्रारंभ में ध्वजारोहण छत्री जैन मंदिर ट्रस्ट कमेटी द्वारा सामूहिक रूप से किया गया और इसके पश्चात बाहर से आने वाले साधर्मीजनों का माल्यार्पण और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन भी किया गया। चातुर्मास के तीन कलश क्रमश: सम्यक दर्शन कलश, बच्चनलाल, देवेन्द्र कुमार जैन पत्तेवालों द्वारा लिया गया जबकि सम्यक ज्ञान कलश राजकुमार जैन जड़ीबूटी और सम्यक चारित्र कलश, बालचंद सुरेशचंद देदखुर्द वालों द्वारा लिया गया। पाद पक्षालन करने का सुअवसर सीएसी अशोक जैन को प्राप्त हुआ, जबकि शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य ज्ञानचंद अनुराग कुमार जैन को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर बाहर से पधारे श्रद्घालुओं का सम्मान ट्रस्ट कमेटी द्वारा किया गया।
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