शिवपुरी. मंदिर में भगवान के दर्शन करें और उनकी पूजा, आरती व गुणानुवाद कर उनके जीवन से कुछ अंगीकार करें। यदि हम इस भावना के साथ भगवान का दर्शन करेंगे तो निश्चित रूप से हमें मुक्ति की राह प्रकट होगी और यदि प्रदर्शन के लिए हम मंदिर आते रहे तो इस संसार से हम कभी भी मुक्त नहीं हो सकते। यह विचार आचार्य सौभाग्य सागर महाराज ने छत्री जैन मंदिर पर सोमवार सुबह धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जब हम मंदिर में भगवान के दर्शन करने घर से निकलते हैं तो हमारा प्रथम लक्ष्य यह होना चाहिए कि हम ईश्वर की प्रतिमा को अपलक निहारकर उन जैसे बनने की कामना करें और मंदिर में आकर भगवान की मुद्रा को देख स्वयं का आत्मावलोकन करें। यदि इस ढंग से जीवन जिया जाए तो यह श्रेयस्कर होगा। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुरत्न सागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति के पास आज समय की बेहद कमी है। सांसारिक और भौतिक वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए तो उसके पास समय है लेकिन खुद के लिए समय नहीं है। यही कारण है कि जिस व्यक्ति को सुबह उठकर सबसे पहले भगवान के दर्शनकरना चाहिए वह दूरदर्शन या टीवी देखकर संसार का दर्शन करना प्रारंभ कर देता है ऐसे में व्यक्ति कैसे आध्यात्म से जुड़ेगा।
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