पोहरी कॉलेज प्रकरण: जांच में मिलीं खामियां

shailendra gupta
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संतोष शर्मा
शिवपुरी-पोहरी महाविद्यालय की भव्य इमारत का निर्माण 1.74 करोड की लागत से किया जाना है जिसमें ठेकेदार और विभागीय अधिकारी कर्मचारी मिलकर भवन को कमजोर करने में लगे हुये हैं। अभी भवन की नींब का कार्य जारी है जिसमें निर्धारित मापदण्डों की अनदेखी की जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि जब नींब ही कमजार होगी तो दो मंजिला मजबूत भवन के निर्माण की सोच भी कैसे सकते हैं। पोहरी छात्रसंघ अध्यक्ष ने घटिया निर्माण के संबंध में कलेक्टर को शिकायत की थी जिसकी जाँच कार्यपालय यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी विभाग को साँपी गई थी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महाविद्यालय भवन निर्माण में कमियां पाई गई हैं। जानकारी के अनुसार महाविद्यालय भवन में घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत छात्रसंघ अध्यक्ष रामलखन धाकड द्वारा की जा चुकी है जिसकी जाँच आरईएस द्वारा की जा रही है, महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक जाँच रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। परंतु सूत्रों की मानें तो निर्माण में निर्धारित मापदंडों के अनुरूप कार्य नहीं हो रहा है। 
 
पिलर्स के लिये खोदे गड्डों की गहराई कम है, कॉलम सेंटर लाईन में नहीं हैं साथ ही सीसी मिक्स की स्ट्रेंथ जाँचने के लिये बनाये गये कुछ क्यूब भी स्ट्रेंथ टेस्ट में कमजोर पाये गये हैं। जिससे महाविद्यालय भवन के भविष्य का अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस स्तर का घटिया निर्माण मापदंडों की अनदेखी कर किया जा रहा है। इस बारे में छात्रसंघ अध्यक्ष रामलखन का कहना है कि घटिया निर्माण में सुधार किया जाना चाहिये साथ ही घटिया निर्माण को अनदेखा करने वाले इंजीनियर के खिलाफ सख्त कार्यवाही करते हुये उसे यहां से हटाया जाना चाहिये। यदि 15 अप्रेल तक इंजीनियर को नहीं हटाया गया तो निर्माण स्थल पर ही कालेज के छात्र-छात्राओं को साथ लेकर धरना प्रदर्शन करेंगे।
 

मापदण्ड

लोक निर्माण विभाग के अनुसार पूरा भवन आरसीसी के पिलर्स पर खड़ा किया जाना है, काली मिट्टी होने के कारण 11 फुट खुदाई करने के बाद 20 एमएम आरसीसी आधार बनाकर पिलर्स खडे किये जाने चाहिये। जिसमें एम 20 मापदण्ड यानि कि 1:4:6 अनुपात में सीमेंट, रेता और गिट्टी का मिश्रण तथा एम 10 मापदण्ड यानि कि 1:3:6 के अनुपात में सीमेंट, रेता और गिट्टी का मिश्रण इस्तेमाल होना था। परंतु निर्धारित मापदण्डों की अनदेखी कर धडल्ले से घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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