अंतत: नईदुनिया "दैनिक जागरण" के हाथों बिक ही गया। लंबी ऊहापोह और ना-नुकुर के बाद दोनों ही अखबार-प्रबंधनों ने इसकी पुष्टि कर दी। आज ही इसका अधिग्रहण नए प्रबंधन द्वारा कर लिया जाएगा।
दरअसल, जागरण समूह द्वारा समूचे नईदुनिया को मय संपत्ति के खरीदे जाने की चर्चाएं पिछले लंबे अरसे से सरगर्म थीं। हालांकि शुरुआत में दोनों ही अखबारों के प्रबंधन इन अटकलों को नकारते रहे। बावजूद इसके नईदुनिया में हुए विभिन्न घटनाक्रम दोनों ही की नकारोक्ति को झुठलाते चले गए। नईदुनिया के बिकने की खबर को तब बल मिला, जब इसके कर्ताधर्ता अभय छजलानी ने बीते दिनों नईदुनिया परिसर से अपना निजी सामान समेट लिया।
इसके बाद बारी आई सेठिया परिवार की। बची-खुची कसर नई दुनिया के समूह संपादक उमेश त्रिवेदी के इस्तीफे ने कर दी। अब बारी आई है, नई दुनिया के नई दिल्ली-एनसीआर वाले संस्करण की। इस संस्करण का आज अंतिम दिन है। नईदुनिया के भागीदार, महेंद्र सेठिया ने कहा कि हां यह सच है। कड़ा निर्णय लेना पड़ा। इसके अलावा कोई चारा भी नहीं था।

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।