शिवपुरी। शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग के बदरवास क्षेत्र के ग्राम बारई में शनिवार को एक शादी की खुशियां उस वक्त मातम और अफरा-तफरी में बदल गईं, जब दाल-बाटी खाने के बाद एक ही परिवार के 7 सदस्य अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। मामला फूड प्वाइजनिंग से कहीं अधिक गंभीर नजर आ रहा है, क्योंकि डॉक्टरों ने भोजन में किसी जहरीले जीव के गिरने या विषैले पदार्थ की आशंका जताई है। विडंबना यह रही कि आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस के लिए 11 बार कॉल करने के बावजूद मदद नहीं मिली, जिसके बाद परिजनों को निजी वाहनों से मरीजों को अस्पताल ले जाना पड़ा। बदरवास अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण इलाज के दौरान भी अव्यवस्थाएं हावी रहीं।
जानकारी के अनुसार ग्राम बारई में शनिवार को राजवीर कुशवाह की शादी के तीसरे दिन दाल-बाटी कार्यक्रम था और परिवार के लोगों जैसे ही दाल-बाटी खाई तो कुछ ने देर में लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी और यह लोग बेहोशी की हालत ही में पहुंच गए। आसपास के लोगों ने गोलू (14) पुत्र हल्के कुशवाह, केपी (18) पुत्र गंगाराम कुशवाह, बबलू (20) पुत्र गंगाराम कुशवाह, पूनम (18) पुत्री हल्के कुशवाह, गंगाराम (50) पुत्र कल्याण सिंह कुशवाह, बिमला (40) पली हल्के कुशवाह व अभिषेक (15) पुत्र के कुराबात को बदरवास अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद तीन लोगों को जिला अस्पताल शिवपुरी रेफर कर दिया, जबकि चार का उपचार बदरवास अस्पताल में जारी है। डॉक्टरों के अनुसार मरीजों में उल्टी-दस्त जैसे सामान्य फूड प्वाइजनिंग के लक्षण नहीं थे, चतिक वे अचेत अवस्था में थे। डॉक्टरों ने आशंका जताई कि संभवत किसी जहरीले जीव के भोजन या सब्जी में गिर जाने से यह स्थिति बनी होगी।
फिर कॉल करने पर नहीं आई 108 एंबुलेंस
मरीजों के परिजन ने आरोप लगाया कि गंभीर हालत होने के बावजूद 108 एम्बुलेंस सेवा समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। संदीप कुशवाह ने बताया कि उन्होंने मोबाइल नंबर 9589604086 से 108 सेवा पर आठ बार कॉल किया, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि गाड़ी उपलब्ध नहीं है। इसके बाद बलवीर कुशवाह ने मोबाइल नंबर 8349677049 से तीन बार कॉल किया, फिर भी एम्बुलेंस नहीं पहुंची। हालात बिगड़ते देख परिजन ने निजी वाहनों की व्यवस्था कर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर एम्बुलेंस मिल जाती तो मरीजों को बेहतर और शीघ्र इलाज मिल सकता था।
स्टाफ की कमी होने से बिगड़ गई व्यवस्था
इधर बदरवास अस्पताल की व्यवस्थाएं भी सवालों के घेरे में रही। अचानक एक साथ सात मरीजों के पहुंचने से अस्पताल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल में सीमित स्टाफ होने के कारण एक ही नर्स मरीजों को बोतल चढ़ाने और इलाज में जुटी रही। इस दौरान एक छोटी बच्ची के हाथ में लगी बोतल खत्म होने के बाद भी काफी देर तक लगी रही। बाद में उस बोतल को बदला गया। बदरवास अस्पताल में यह पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि जब एक्सीडेंट के मामले आते तब भी वही हाँच-पाँच की स्थिति बन जाती है।
गांव में जब लोगों की तबीयत खराब हुई तो कई बार 108 पर
परिवारजनों ने फोन किया। पर हर बार गाड़ी न होने की बात बोली गई। बाद में मैंने तीन निजी वाहनों से इन लोगों को अस्पताल पहुंचाया।सत्यपाल यादव, सरपंच प्रतिनिधि ग्राम मारई
पूनम नहीं दे पाई परीक्षा
कक्षा 12वीं की छात्रा पूनम कुशवाह अपनी द्वितीय अवसर को परीक्षा भी नहीं दे सकी। परिजन के अनुसार पूनम का पीसीएस विषय का पेपर था, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने से परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच पाई।
कई बार लिख चुके पत्र
108 एंबुलेंस की समस्या पहली बार नहीं आई है। इससे पूर्व में भी कई गंभीर मामले सामने आए हैं। हमने कई बार 108 के मुख्यालय को पत्र लिखे हैं। पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बदरवास अस्पताल में स्टाफ नर्सों की कमी होने की जानकारी भी हम वरिष्ठ उसी से लोगों को बेहतर इलाज देने का प्रयास करते है। कार्यालय को दे चुके है। जो स्टाफ है.
चैतन्य कुशवाह, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर बदरवास

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