ग्वालियर रियासत में ईसागढ़ के थानेदार ने रखी थी इस बांके बिहारी मंदिर की नींव

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बामौरकलां
। पिछोर-चंदेरी मार्ग स्थित श्री 1008 बांके बिहारी मंदिर में शनिवार से आस्था, संस्कृति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। 89 वर्ष पुराने इस मंदिर के भव्य जीर्णोद्धार के बाद 7 दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव और श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ, जिसने पूरे कस्बे को भक्तिमय बना दिया।

251 कलश यात्रा बनी आकर्षण, गूंजा राधे-राधे

महोत्सव की शुरुआत भव्य कलश यात्रा से हुई। माता मंदिर से निकली इस शोभायात्रा में 251 महिलाएं पीतांबर धारण कर सिर पर मंगल कलश लेकर शामिल हुईं। ढोल-नगाड़े, शंखनाद और ‘हरे कृष्ण-हरे राम’ के जयघोष के बीच यात्रा बस स्टैंड, मेन मार्केट, लोधी मोहल्ला और गांधी चौक से होते हुए मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में 17 स्थानों पर पुष्प वर्षा, शरबत और फलाहार से श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। मंदिर पहुंचने पर 11 आचार्यों ने वेद मंत्रों के साथ कलश स्थापना कराई, जिससे पूरा वातावरण भक्ति रस में डूब गया।

1936 की विरासत, आज भी जीवंत

इस मंदिर की नींव 4 मार्च 1936 को पं. गजाधर प्रसाद पाण्डे ने रखी थी। वे ग्वालियर रियासत में ईसागढ़ के थानेदार रहे और अपनी बहादुरी व कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। कहा जाता है कि दिन में कानून की रक्षा और रात में भक्ति में लीन रहना उनका जीवन था। उनकी प्रेरणा से बना यह मंदिर आज भी क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

तीन पीढ़ियों ने संभाली आस्था की विरासत

पं. गजाधर प्रसाद की विरासत को उनके पुत्र स्व. सीताशरण दुबे और रामसनेही दुबे ने आगे बढ़ाया। अब तीसरी पीढ़ी - संतोष, राकेश, शिवकुमार, कृष्ण कुमार, दीपक और विजय दुबे,ने करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण कराया है।

मंदिर की प्रमुख विशेषताएं:
  • गर्भगृह: मकराना संगमरमर और चांदी के द्वार
  • शिखर: 51 फीट ऊंचा, पंचधातु का स्वर्ण कलश
  • सभामंडप: 500 श्रद्धालुओं की क्षमता, एसी सुविधा
  • वृंदावन से भागवत कथा, 7 दिन तक भक्ति रस

महोत्सव में वृंदावन से आए आचार्यों द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया जा रहा है। रामानुज आचार्य के सानिध्य में योगेश द्विवेदी, देवेंद्र शास्त्री और जगदीश दुबे सहित 11 विद्वान ब्राह्मण अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।

विरासत से विकास तक - ग्रामीणों में उत्साह

मंदिर के नए स्वरूप को देखकर क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। वर्षों से इस मंदिर से जुड़े श्रद्धालु इसे अपनी आस्था का केंद्र मानते हैं। ग्राम पंचायत ने भी दुबे परिवार के इस योगदान की सराहना करते हुए सम्मान समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है।

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