एक्सरे @ ललित मुदगल। शिवपुरी कृषि उपज मंडी शिवपुरी में किसानों को टाका लगाना एक धर्म बन चुका है। मंडी में धर्म कांटा तो नहीं है लेकिन किसानों की तौल मे टांका लगाना एक धर्म और मंडी का अघोषित संविधान बन चुका है। इसी टांके के धर्म की शिकायत कलेक्टर शिवपुरी अर्पित वर्मा को की है। कलेक्टर ने उक्त शिकायत को एसडीएम शिवपुरी को फॉरवर्ड कर दिया है। शिकायतकर्ता और पीड़ित किसानों ने कहा कि एसडीएम शिवपुरी ने कहा है कि आपकी समस्या का तत्काल निराकरण होगा लेकिन लगता नहीं है कि शिवपुरी के मंडी के भारसाधक अधिकारी एसडीएम शिवपुरी अब किसानों की समस्या और मंडी में बढ़ते भ्रष्टाचार को कम करने का भार उठा सकते है।
पहले आप समझे आज के मामले को
दीपक धाकड़ ने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को वह पिपरसमा मंडी में लहसुन बेचने गया था। उसके अनुसार वह करीब 10 क्विंटल 80 किलो लहसुन लेकर पहुंचा था, जिसका अनुमानित भुगतान करीब 54 हजार रुपये होना चाहिए था, लेकिन उसे मात्र लगभग 2500 रुपए कम दिए। किसानों का आरोप है कि मंडी में व्यापारी द्वारा 42 किलो की तौल बताकर केवल 40 किलो का भुगतान किया जा रहा है। यानी हर बोरी पर करीब 2 किलो का नुकसान किसानों को झेलना पड़ रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यह गड़बड़ी किसी एक किसान के साथ नहीं, बल्कि कई किसानों के साथ हो रही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी किसानों के माल का सही तौल के आधार पर पूरा भुगतान कराया जाए और संबंधित व्यापारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। शिकायत पत्र पर कई किसानों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं, जिससे मामले की गंभीरता स्पष्ट होती है।
2 किलो प्रति मन का आंकड़ा पहुचता है 12 करोड़ से अधिक पर
इस आवेदन को देशी भाषा मे लिखे तो एक मन अर्थात 40 किलो पर 2 किलोमाल एक्स्ट्रा लिया जाता है। एक क्विलटल् पर लगभग 5 किलो माल किसानों को चुना लगाया जाता है। अगर इस हिसाब को जोड़ा जाये तो प्रतिदिन लाखों रुपए का टाका किसानों को लगाया जाता है। मंडी प्रबंधन इस खुली लूट को खुली आंखो से स्वीकार का रहा है,इसी हिसाब की ओर गहराई जाते है तो मंडी में प्याज लहसुन का सीजन लगभग 100 दिन चलता है अप्रैल से जून तक यह सीजन चलता है।
प्रतिदिन लगभग 2 हजार ट्रॉली मंडी में आती है,एक ट्रॉली में 25 क्विंटल माल आता है और इसका टोटल निकाले तो 50 हजार क्विंटल माल प्रतिदिन मंडी में आता है और एक क्विंटल पर आढ़त के नाम पर 5 किलो माल अतिरिक्त लिया जाता है तो यह हिसाब 2500 क्विंटल माल किसानों का आढ़त के नाम पर लिया जाता है,इस माल को किमत जोड़े तो 5 रूपए किलो के हिसाब से यह माल 12 लाख 50 हजार का होता है और इसका 100 दिन का आंकड़ा निकाले तो यह माल 12 करोड़ की चोरी होती है।
मंडी नियमों का उल्लंघन: मंडी एक्ट के अनुसार, किसान से उसकी उपज की तुलाई के अलावा आढ़त या किसी भी अन्य नाम पर अतिरिक्त अनाज लेना कानूनी रूप से गलत है। यह अघोषित कटौती सीधे तौर पर किसान की जेब पर डाका है।
कुल मिलाकर शिवपुरी मंडी में किसानों की सांसो पर भी टैक्स लगाया जा रहा है। कच्ची आढ़त के नाम पर करोडो खेला किया जा रहा है। वही इस पूरे आंकड़े में कच्ची पर्ची पर माल खरीदा जाता है। कच्ची पर्ची पर माल खरीदने पर मंडी टैक्स का भारी घाटा होता है,यह 2 किलो का खेल इतना बड़ा होगा यह किसी ने नहीं सोचा होगा,लेकिन आंकड़ों के गणित में 12 करोड़ का भ्रष्टाचार केवल प्याज में होता है। मंडी में एक संगठित गिरोह किसानों को लूटने का काम करता है। इसका उदाहरण केवल एक चार करोड़ की कोठी से दिया जाता है,और इस कोठी का मालिक एक मजदूर है। इस पूरे मामले में मंडी के भार साधक अधिकारी एसडीएम आनंद सिंह राजावत से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका है।
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