शिवपुरी। जिले का जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एक बार फिर गहरे आर्थिक संकट में फंसता नजर आ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बैंक में पैसा आना लगभग बंद हो गया है, जबकि निकासी लगातार जारी है। यानी इनकमिंग थम गई है और आउटगोइंग बढ़ती जा रही है,जिससे बैंक की वित्तीय सेहत तेजी से बिगड़ रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरकार से मिलने वाला 50 करोड़ रुपये का टॉप अप अब तक जारी नहीं हुआ है। इस राशि के सहारे बैंक को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन किस्त अटकने से स्थिति और नाजुक हो गई है।
दूसरी किस्त अटकी, बढ़ा वित्तीय दबाव
साल 2025 में प्रदेश सरकार ने सहकारी बैंक को राहत देने के लिए 50 करोड़ रुपये की पहली अंश पूंजी दी थी। इस राशि से बैंक की स्थिति में कुछ सुधार आया और लेन-देन में तेजी देखने को मिली। लेकिन 31 मार्च 2026 तक मिलने वाली दूसरी किस्त जारी नहीं हो सकी। नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करते ही बैंक फिर से नकदी संकट से जूझने लगा है। प्रदेश के कुल 6 जिलों के सहकारी बैंक भी इसी तरह दूसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं।
गबन की राशि अब भी दूर, कार्रवाई ठंडी
कोलारस शाखा में सामने आए 80.56 करोड़ रुपये के गबन मामले में चार साल बाद भी न तो पूरी वसूली हो पाई है और न ही आरोपियों की गिरफ्तारी। तत्कालीन महाप्रबंधक ए.एस. कुशवाह, डी.के. सागर, वाई.के. सिंह, लता कृष्णन और सीबीएस प्रभारी प्रभात भार्गव के खिलाफ एफआईआर दर्ज है, लेकिन कार्रवाई धीमी है। जिन खातों में गबन की राशि पहुंची, वहां से भी रिकवरी नहीं हो सकी।
भरोसा टूटा, 42 करोड़ की निकासी
बैंक की गिरती साख का सबसे बड़ा असर ग्राहकों के व्यवहार में दिख रहा है। खाताधारक लगातार पैसा निकाल रहे हैं, लेकिन जमा करने से कतरा रहे हैं। बीते एक साल में करीब 42 करोड़ रुपये की निकासी हुई है, जिसमें अकेले पिछोर शाखा से 17 करोड़ रुपये निकाले गए। नकदी जमा न होने से बैंक की स्थिति और कमजोर होती जा रही है।
पहली किस्त से दिखा था सुधार
पहली अंश पूंजी के 50 करोड़ रुपये मिलने के बाद बैंक ने एक साल में 184 करोड़ रुपये का टर्नओवर किया था। इस दौरान 67 करोड़ रुपये किसानों को ऋण के रूप में वितरित किए गए, जबकि 38 करोड़ रुपये मार्कफेड को चुकाए गए। इसके अलावा 37 करोड़ रुपये अपेक्स बैंक के ब्याज के रूप में अदा किए गए और खाताधारकों को 42 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया।
अधिकारी बोले,जल्द मिलेगी राहत
जांच अधिकारी एवं एसडीओपी कोलारस संजय मिश्रा ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए नोटिस जारी किए गए हैं और जल्द कार्रवाई की जाएगी। वहीं सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि दूसरी किस्त जारी कराने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है और जल्द सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।
संभावित असर
यदि जल्द ही 50 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी नहीं हुई और गबन की राशि की वसूली में तेजी नहीं आई, तो सहकारी बैंक की स्थिति और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बैंक में भरोसा बहाल करना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
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