बूढाडोंगर की दीदियां बनेगी 10 करोड़ की फैक्ट्री की मालिक सिंधिया, पढिए खबर

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शिवपुरी। शिवपुरी जिले के बदरवास क्षेत्र के बूढ़ा डोंगर गांव में शनिवार का दिन सिर्फ एक उद्घाटन भर नहीं था, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के सपनों के सच होने का उत्सव बन गया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यहां करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से बनी आधुनिक कपड़ा सिलाई फैक्ट्री का लोकार्पण किया। यह फैक्ट्री न केवल रोजगार का केंद्र बनेगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी देगी।

इस पहल की खास बात यह है कि आजीविका मिशन से जुड़ी 253 महिलाओं को पहले ही सात बैच में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। फैक्ट्री के पहले चरण में 169 अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार काम करेंगी। नोएडा के बैलेसिया ग्रुप के साथ हुए एमओयू के तहत फैक्ट्री को 15 हजार कपड़ों का पहला बड़ा ऑर्डर भी मिल चुका है- जो इसकी शुरुआत को और मजबूत बनाता है।

कार्यक्रम में सिंधिया ने भावुक अंदाज में अपने पुराने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि डेढ़ साल पहले इसी क्षेत्र की महिलाओं ने उन्हें एक भगवा जैकेट पहनाई थी, जिसे वे आज भी बड़े कार्यक्रमों में गर्व से पहनते हैं। उसी पल से उनके मन में इस हुनर को देश और दुनिया तक पहुंचाने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने गौतम अदाणी से चर्चा की और अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से यह सपना साकार हुआ।

उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा

कि यह फैक्ट्री सिर्फ रोजगार देने का माध्यम नहीं है, बल्कि आने वाले समय में यह एक कंपनी का रूप लेगी, जिसमें महिलाएं ही शेयरहोल्डर बनेंगी। अगले तीन वर्षों में इसका मालिकाना हक भी उन्हीं के हाथ में होगा। मेरी दीदियां अब सिर्फ सिलाई करने वाली नहीं रहेंगी, बल्कि इस कारखाने की मालकिन बनेंगी, उन्होंने गर्व से कहा।

क्या आप प्रधानमंत्री से मिलना चाहती हैं

कार्यक्रम के बाद जाते समय सिंधिया अचानक गाड़ी रोककर महिलाओं के बीच पहुंचे और एक नई घोषणा कर दी। उन्होंने पूछा- क्या आप प्रधानमंत्री से मिलना चाहती हैं ? जब महिलाओं ने उत्साह से हां कहा, तो उन्होंने कहा कि जो महिला सबसे बेहतरीन “मोदी जैकेट” बनाएगी, उसे उनके समूह के साथ मोदी जी से मिलवाने की कोशिश की जाएगी। इस घोषणा ने महिलाओं में उत्साह की नई लहर दौड़ा दी।

फैक्ट्री का विस्तार भी चरणबद्ध तरीके से होगा

पहले चरण के बाद दूसरे और तीसरे चरण में मशीनों की संख्या बढ़ाकर एक साल के भीतर कुल 600 मशीनें स्थापित की जाएंगी। 49 हजार वर्गफीट में फैली इस फैक्ट्री में भविष्य में 1800 महिलाओं को रोजगार मिलेगा। हर महिला को 15 से 20 हजार रुपये मासिक आय होगी, यानी सालाना लगभग ढाई लाख रुपये- जिससे करीब 2 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में कदम बढ़ाएंगी। यह फैक्ट्री अब सिर्फ उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि बदरवास की महिलाओं की नई पहचान और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बनती नजर आ रही है।

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