खाडेराव रासो में कवि ने लिखा कि खाडेराव की इस बरात का वर्णन शब्दो में नही किया जा सकता | Shivpuri News

Updesh Awasthee
0
कंचन सोनी/शिवपुरी। इस समय महाराज अनूपसिंह बैराड में नही थे। दोनो राजकुमारो को वे बैराड छोड किसी आवश्यक काम से पुन:शिवपुरी लौट चुके थें।पंडित चतुरानन और ठाकुर बलवीर सिंह ने निश्चय किया कि अब दोनो कन्याओ के हाथ पीले होने का समय भी हो गया हैं,तत्काल महाराज अनूपसिंह से दोनो राजकुमार की शादी की चर्चा कर लेनी चाहिए। 

पंडित मिश्र और ठाकुर साहब ने भी निश्चय कर लिया कि वे भटनावर और शिवपुरी जाकर विवाह संबध की बातचीत कर शादी को पक्की कर सके। ठाकुर साहब और पंडित मिश्र दोनो ने महाराज अनूपसिंह से खाडेराव और गजंसिह की शादी की बात की। भटनावर से खाडेराव के पिता पंडित व्रंदावन को बुलाबा भेज गया। पूर्णमासी के दिन को सगाई पक्की हुई। पंडित वृंदावन का टीका भटनावर ही चढाना चाहते थे,लेकिन महाराज अनूपसिंह के आग्रह पर खाडेराव और गजसिंह का टीका शिवपुरी ही चढाने का तय हुआ।

अगहन के माह में दोनो की शादी बनी और बैराड बारात गई। खाडेराव रासो में कवि ने लिखा है कि इस भव्य बरात का वर्णन शब्दो में नही किय जा सकता। बैराड को इस बारात के आगमन के लिए पुष्पो से सजा दिया गया। एक घोडे पर वीर वर खाडेराव चल रहे थे और दूसरे घोडे पर गजसिंह बैठे थे। पूरा बैराड इस भव्य बरात का साक्षी बनना चाहता था।

इस कारण बारात पर फूलो की वर्षा की जा रही थी। ठाकुर बलवीर सिंह की हवेली पर बारात पहुंची। बारात का सम्मान सहित भोजन व्यवस्था की। दोनो कन्याओ के रेश्मी वस्त्र और सौलह श्रंगार किए गए। वरमाला की रस्म अदा की गई। भव्य और अदुभत मंडप सजाया गया। वेद मंत्रो की उच्चारण से दोनो की सात वचन फेरे आदि से शादी की रस्मे कराई गई और ससम्मान बारात की विदा की गई। 

शिवपुरी के राजमहल में रानी मृगावती और खाडेराव की मां अनूपदेवी दोनो वधुओ की आगवनी के लिए उपस्थित थी। देहरी पर डोलिया पहुंचते ही दोनो पर पुष्प वर्षा हुई। मंगलचार गायन हुआ। चंदन,केशर और अनेक तरह के पुष्पो से दोनो बधुंओ के स्वागत मण्डप सजाये गये।

अगले अंक में,इस समय भारत पर मुगलो का कब्जा था। मुगल बादशाह इस समय दक्षिण अभियान पर थें। उनसे मिलने के लिए उनका बडा पुत्र आजम और उनकी प्रिय पुत्री जेबुन्निसा भी साथ थी,रास्ते में नरवर के दुर्ग पर पडाव डाला गया और खाडेराव के साथ् हाथियो के शिकार के समय खाडेराव की वीरता का गुणगान आजम ने किया और जेबुन्निसा खाडेराव के इस गुण पर मोहित हो गई थी।

Post a Comment

0Comments

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!