फायनल नही सेमीफायनल में ही उलझी भाजपा, अजेय सिंधिया के खिलाफ किसे भेजे रण में | Shivpuri News

ललित मुदगल/शिवपुरी। शिवपुरी-गुना लोकसभा सीट पर सिंधिया राजवंश का मजबूत जानाधार हैं। यहां पार्टी चुनाव नही जीतती बल्कि सिंधिया ब्रांडनेम चुनाव विजयी होता है या जिस नेता पर इस ब्रांड नेम का टेग होता है वह चुनाव में विजयी होता हैं।पिछली बार प्रचंड मोदी की लहर में भी भाजपा के नेता और महल विरोध का सबसे बुलंद झंडा उठाने वाले जयभान सिंह पवैया भी सवा लाख वोटो से सांसद सिंधिया से चुनाव हारे थे।  

भाजपा सत्ता में किसी भी कीमत पर वापसी चाहती हैं,मप्र,राजस्थान,उप्र और छत्तीसगढ से होकर ही भाजपा का रास्ता दिल्ली गया था,या सीधे-सीधे कह ले कि हिन्दी भाषी प्रदेश ही भाजपा की असली ताकत हैं। अब मप्र,राजस्थान और छत्तीसगढ भाजपा विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं।

मप्र में 29 लोकसभा सीटे हैं,भाजपा ने इन सभी सीटो पर चुनाव जीतने का ऐलान किया था लेकिन अब फोकस 27 सीटो पर है,कांग्रेस यह मान चुकी है कि सिंधिया ओर कमलनाथ की सीट  से चुनाव नही जीता जा सकता हैं किसी बडे नाम वाले नेता को यहां से उतारा जाए तो इन्है सिर्फ उलझाया जा सके। जिससे यह अन्य किसी सीट पर अपनी ताकत नही लगा सके। 

सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया इस सीट से चार बार चुनाव लडक़र जीत चुके हैं और भाजपा ने उन्हेें हराने के लिए चारों बार अपने तरकश के हर तीर का इस्तेमाल किया है। लेकिन उसे सफलता हांसिल नहीं हुई है। सांसद सिंधिया के पूर्व अनेकों बार उनके पिता स्व. माधवराव सिंधिया और दादी स्व. राजमाता विजयराजे सिंधिया जीत चुकी हैं। सिंधिया परिवार को इस सीट पर प्रतिकूल से प्रतिकूल स्थिति में भी कभी पराजय का सामना नहीं करना पड़ा।

खबरों के अनुसार भाजपा इन सीटों पर अपने प्रभावशाली नेताओं को उतारने पर गंभीरता से विचार कर रही है। ताकि सिंधिया और कमलनाथ की घेराबंदी की जा सके। जहां तक छिंदबाड़ा सीट का सवाल है तो यह माना जा रहा है कि कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस इस सीट पर उनकी पत्नी अथवा पुत्र नकुलनाथ को टिकट दे सकती है। 

लेकिन गुना सीट पर सिंधिया का चुनाव लडऩा निश्चित है। विधानसभा चुनाव में ग्वालियर चंबल संभाग की 34 सीटों में से 26 सीटों पर कांग्रेस की विजय से सिंधिया का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ है। गुना लोकसभा क्षेत्र की 8 सीटों मेें से पांच सीटों पर कांग्रेस और तीन सीटों पर भाजपा विजयी हुई है। 

पिछले लोकसभा चुनाव मेें जब देशभर में मोदी लहर थी और नरेंद्र मोदी ने शिवपुरी में भी आमसभा को संबोधित किया था। तब भी सिंधिया ने भाजपा के प्रबल महल विरोधी मजबूत उम्मीदवार जयभान सिंह पवैया को लगभग 1 लाख 20 हजार मतों से पराजित किया था। अभी तक सिंधिया गुना सीट पर चार बार चुनाव लड़ चुके हैं। जिनमें से सिर्फ एक बार 2004 में भाजपा लहर में उनकी जीत का अंतर 1 लाख मतों से घटकर 87 हजार मतों पर पहुंचा था। उनके पिता स्व. माधवराव सिंधिया की मौत के बाद हुए उपचुनाव में सिंधिया चार लाख से अधिक  मतों से विजयी रहे थे। 

उनके खिलाफ भाजपा ने 2002 और 2004 में स्थानीय उम्मीदवार स्व. देशराज सिंह यादव और हरीवल्लभ शुक्ला को चुनाव मैदान में उतारा था। वहीं 2009 में प्रदेश सरकार के केबिनेट मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को चुनाव लड़ाया। लेकिन वह ढ़ाई लाख मतों से चुनाव हार गए। 2014 मेें मोदी लहर में भाजपा ने जयभान सिंह पवैया को अड़ाया। लेकिन वह भी बुरी तरह परास्त हुए। ऐसे में भाजपा असमंजस में हैं कि वह गुना सीट पर किसे टिकट दें। फायनल मुकाबला तो बाद में होगा सेमीफायनल में ही अभी भाजपा उलझी है कि अजेय सिंधिया के खिलाफ किसे टिकिट दे भाजपा। 

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