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राष्ट्रीय हैण्डबॉल प्रतियोगिता मे हंगामा: कुर्सिया तोडी, बीच मैच में खिलाडियों में धक्का-मुक्की | Shivpuri News

शिवपुरी। शिवपुरी हैण्डबॉल प्रतियोगिता में उस समय बबाल खडा हो गया जब बालक वर्ग के मध्यप्रदेश और हरियाणा टीम के मध्य क्वार्टर फायनल मुकाबला खेला जा रहा था। इस दौरान मैच खिला रहे रैफरी के ऊपर एक पक्षीय फाऊल देने के आरोप लगाते हुए हरियाणा राज्य के खिलाडिय़ों ने धक्का मुक्की और तोडफ़ोड़ शुरु कर दी इसके चलते यह मैच बीच में ही रोक दिया गया और हरियाणा की टीम को अभद्रता के आरोप में गेम से बाहर कर दिया गया। 

नेशनल स्कूल गेम फेडरेशन द्वारा नियुक्त किए गए खेल निर्णायकों की भूमिका पर भी आज नेशनल स्कूल हैण्डबाल स्पर्धा के दौरान हरियाणा टीम की महिला कोच प्रीति ने गम्भीर सवाल खड़े किए हैं। महिला कोच प्रीति ने आज हुए बालिका वर्ग के क्वार्टर फायनल मैच मध्यप्रदेश विरुद्ध हरियाणा स्टेट में गलत निर्णय देने और एक पक्षीय विसिलिंग करने के आरोप मैच रैफ्री पर लगाए हैं साथ ही प्रबंधन पर असुनवाई का भी आरोप जड़ा है। 

हालांकि स्पोर्ट्स आफिशियल्स ने इन आरोपों को हरियाणा टीम की बड़ी हार की खींझ बताते हुए सिरे से खारिज किया है। शाम के समय हरियाणा और मध्यप्रदेश की बालक वर्ग की टीम के बीच ग्राउण्ड नम्बर 4 पर क्वार्टर फायनल मैच शुरु हुआ। इस मैच में शिवपुरी के ही शिवनाथ वैस को रैफ्री बनाया गया इनके साथ एक अन्य टेबिल रैफ्री कामले, योगिता आदि भी मौजूद बताए गए। 

आरोप है कि मैच शुरु होते ही हरियाणा के खिलाडिय़ों को मैच रैफ्री द्वारा गलत फाऊल देकर रैड कार्ड दिखाना शुरु कर दिया गया। खुद को हरियाणा की कोच बताने वाली कु प्रीति और अन्य आफिशियल्स ने जब इसका विरोध जताया और एक पक्षीय निर्णय पर सवाल उठाए तो हरियाणा के कोच को भी रैड कार्ड दिखा दिया गया। महिला कोच प्रीति का तो यहां तक आरोप है कि उन्हें यहां रैफरशिप कर रहे रैफ्री ने कथित तौर पर यह कह कर अलग कर दिया कि जिसकी धरती उसका मैडल। 

यहां हालात यह बने कि वहां हंगामा खड़ा हो गया, कथित असुनवाई से गुस्साए हरियाणा टीम के खिलाडिय़ों ने मैदान में कुर्सियां उछालना, तोडऩा और पटकना शुरु कर दिया। यहा भारी  तोडफ़ोड़ शुरु हो गई। हरियाणा कोच प्रीति का कहना है कि शिवपुरी के जिस मैच रैफरी शिवनाथ वैस को इस मैच का निर्णायक बनाया था वे एमपी की टीम में खेल रहेे शिवपुरी के खिलाडिय़ों के कोच भी रहे थे, ऐसे में उनकी तटस्थता वैसे भी संदिग्ध थी। जानबूझकर इस क्ववार्टर फायनल को एमपी के हक में दिलाने के लिए सोचा समझा तानाबाना बुना गया था। 

जिला खेल अधिकारी एमएस तोमर का कहना है कि जिस समय विवाद हुआ उस समय वे कलेक्टर के पास गए हुए थे बाद में उन्हें पता चला है। इनका कहना है कि मैच में विवाद हरियाणा की टीम के खिलाडिय़ों ने ही शुरु किया था। इस विवाद पर ग्राउण्ड प्रभारी और फिजिकल कालेज के प्राचार्य मनोज निगम का कहना है कि मैच में विवाद की शुरुआत हरियाणा टीम की ओर से हुई, वहां के खिलाड़ी एमपी के खिलाडिय़ों को धक्कामुक्की करने लगे, मैदान में गिराने लगे जब इस पर रैफ्री ने रेड कार्ड दिखाया तो हंगामा शुरु कर दिया। रही बात मैच रैफरी के पक्षपात की तो ये रैफरी एसजीएफआई द्वारा नियुक्त थे। 

बकौल श्री निगम जब हरियाणा की टीम मप्र के 22 गोल के विरुद्ध 12 केे स्कोर पर थी तब उन्होंने मैदान में हंगामा शुरु कर दिया जिसके कारण पूरी टीम को ही बाहर करना पड़ा और मैच निर्धारित समय से लगभग सात मिनिट पूर्व बीच में ही रोक दिया गया। एमपी को 22- 12 से विजयी घोषित कर दिया गया तो कोच और मैनेजर ने स्कोर शीट पर हस्ताक्षर करने से हाथ खड़े कर लिए मगर बाद में ये हस्ताक्षर को राजी हो गए।