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अपने हक के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं 24 युवा, आरक्षण के नाम पर लटका रखा हैं | Shivpuri News

शिवपुरी। किसी सरकारी कर्मचारी की आकास्मिक मौत के बाद उसके भरण-पोषण के लिए उसके परिवार के किसी एक सदस्य को तत्काल नौकरी दी जाए, इस कारण ही अनुकम्पा नियुक्ति का प्रावधान कर्मचारी के परिवार हित बनाया गया। कानून तो बन गया लेकिन सरकारी अधिकारी अपने कर्मचारी के परिवार के प्रति सहानभूति नही रखतें ऐसे एक नही 24 प्रकरण केवल जिला पंचायत में सामने आ रहे हैं।  

जानकारी के अनुसार इस समय जिला पंचायत में पंचायत सचिवो की अनुकंपा नियुक्ति के 24 मामले लटके हैं और इन्है आरक्षण के नाम से लटका दिया हैं। इन परिवारो के सदस्य पिछले 1 साल से दर-दर की ठोकरे आ रहे है इन्है कोई ठोस जबाव नही मिल रहा हैंं,ऐसी स्थिती में इन युवाओं के परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खडा हो गया। युवाओं का कहना है कि वह एक साल से भी अधिक समय से अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक नियुक्ति नहीं दी गई है। युवाओं का कहना है कि आरक्षण के फेर मे उनकी नियुक्ति को अटकाए हुए हैं। जिससे उनके परिवारों के सामने अब रोजी रोटी का संकट खडा हो गया है।

यह 24 युवा भटक रहे अनुकंपा नियुक्ति के लिए

जिन 24 युवाओं को अनुकंपा नियुक्ति दी जानी है उनमें अक्षय श्रीवास्तव, विशालसिंह रघ्ुवंशी, राधिका रघुवंशी, रामवीर सिंह लोधी, कल्लू लोधी, दीपक दुबे, सतेन्द्र रघुवंशी, बलवीर सिंह यादव, पवन भदौरिया, अंकित श्रीवास्तव, ललिताबाई, मोहन नामदेव, राजेश रावत, कल्याणसिंह धाकड, सुनील कुशवाह, अनिल यादव, लोकेन्द्र यादव, आशीष शर्मा, भगवानदास कुशवाह शामिल हैं जिन्होंने एक साल पहले आवेदन सहित समस्त दस्तावेज जिला पंचायत को उपलब्ध करा दिए लेकिन आज तक इनकी नियुक्ति नहीं हो सकी है।

33 पद खाली फिर भी नहीं की नियुक्ति

जिले की 600 पंचायतों में से करीब 33 पंचायतों में पंचायत सचिव के पद खाली है। ऐसे में इन 24 युवाओं की अनुकंपा नियुक्ति कर इन्हें नौकरी पर रख लिया जाना चाहिए था, लेकिन अब तक इन्हें नौकरी नहीं दी गई है। युवाओं का कहना है कि जिले में 33 पद खाली हैं और 24 युवाओं को ही अनुकंपा नियुक्ति देनी है, फिर अधिकारी किस वजह से इस मामले को लटकाए हुए हैं।

आरक्षण प्रक्रिया के चलते लटकी हैं नियुक्तियां

पंचायत सचिव के पदों को लेकर आरक्षण प्रकि्‌या के तहत ही पदों को भरा जाना है। अधिकारी अभी तक आरक्षण की प्रकि्‌या को पूरा नहीं कर पाए हैं, जिसके चलते इन अनुकंपा नियुक्तियों को नहीं किया जा रहा है, जबकि युवाओं का कहना है कि आवेदन उनके एक साल से अधिक समय से जमा है, जबकि आरक्षण का नियम बाद में आया है। यदि अधिकारी चाहते तो उनकी नियुक्ति पहले ही कर सकते थे।

परिवार के भरण पोषण में हो रही परेशानी

जिला पंचायत कार्यालय पर आए युवा अक्षय श्रीवास्तव, बलवीर यादव, राजेश रावत व कल्याण सिंह ने बताया कि उनके पिता की वेतन से ही परिवार का भरण पोषण होता था। ऐसे में एक साल से वह किसी तरह से अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं, लेकिन अब परेशानी आ रही है। छोटे भाई बहनों की पढाई तक बाधित हो रही है। ऐसे में जल्द से जल्द अनुकंपा नियुक्ति की जाए, जिससे वह अपने परिवार का भरण पोषण आसानी से कर सकें।

बीई करने वाले युवक ने भी भरा है अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन

बदरवास की ग्राम पंचायत अकाझिरी के रहने वाले रामवीर लोधी ने भी पंचायत सचिव के लिए अनुकंपा नियुक्ति के तहत आवेदन भरा है। रामवीर लोध्ी ने बीई की है। रामवीर का कहना है कि पिता की मौत के बाद वह गांव आकर बस गए हैं और पिता के वेतन से ही उसके परिवार का भरण पोषण होता था। ऐसे में पिता की मौत के बाद उसने पंचायत सचिव की नौकरी के लिए अनुकंपा नियुक्ति के तहत आवेदन पत्र जमा किया है, लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं दी गई है।

जनसुनवाई से लेकर कलेक्टर से लगा चुके हैं गुहार

युवाओं का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए वे जनसुनवाई में 20 से 25 बार आवेदन दे चुके हैं, जबकि तत्कालीन कलेक्टर शिल्पा गुप्ता ने उन्हें दो माह का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई है। युवाओं ने बताया कि एडीएम और सीईओ जिला पंचायत को बैठक करनी है, लेकिन दोनों ही के पास समय नहीं हैं, जिससे यह नियुक्ति अटकी हुई हैं।

यह बोले सीईओ जिला पंचायत

अनुकंपा नियुक्ति के मामले में जवाब एडीएम ही देंगे। नियुक्ति को लेकर बैठक आयोजित होनी है, लेकिन अभी तक बैठक नहीं हुई है, जिससे अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है।
राजेश जैन, सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी।
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