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सफेद पाउडर: नशे की गिरफ्त में शिवपुरी, इंजेक्शन से खून में मिलाया जा रहा है जहर | Shivpuri News

शिवपुरी। इन दिनों शहर सफेद पाउडर की गिरफ्त में है। पुलिस पूरी तरह से इन सफेद पाउडर के विक्रेताओं को खुला संरक्षण दे रही है। जिसके चलते मासूम युवा अपने जीवन से खिलबाड कर इस जहर को अपनी रगों में घोल रहे है। नौनिहालों का जीवन सुधारने और देश का भविष्य बनाने का सपना लेकर समय-समय पर तमाम योजनाएं लागू की गईं किन्तु वास्तविकता से धरातल पर न केवल यह योजनाएं दम तोड़ती नजर आती हैं बल्कि विसंगति पूर्ण पहलू यह है कि इन संस्थाओं द्वारा आज तक इन युवाओं के भविष्य की ओर किसी ने भी कोई ध्यान नहीं दिया हैं न ही इन नशे की गिरफ्त की ओर बढ़ रहे युवाओं को रोकने का प्रयास किया। 

जबकि इनका दायित्व बनता था कि इन नौनिहालों की जिंदगी की दिशा और दशा को कैसे बदला जाए। वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन भी इस अवैध रूप से शिवपुरी में आ रही स्मैक को कैसे रोका जाए। इस ओर किसी ने भी कोई प्रयास नहीं किया इसका परिणाम यह हैं आज दर्जनों परिवार के युवा बच्चे इस नशे की गिरफ्त में हो गए हैं। वह भी सामने आ जाता है जहां कोई नौनिहाल नशे की गिरफ्त में तो कोई कबाड़ा बीनने, होटलो, ढाबों पर श्रम मूलक काम करने में लिप्त नजर आता है। सही दिशा न मिलने से यह नौनिहाल अपने जीवन को नशे अथवा अन्य गलत कार्यो की ओर मोड़ते जा रहे हैं जो भविष्य के माथे पर चिंता की  लकीरें खीच रहा है। जबकि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुरानी शिवपुरी क्षेत्र में स्मैक के अवैध करोबार खुलेआम किया जा रहा हैं। जिसमें देहात थाने के कुछ पुलिसकर्मी भी संलिप्त बताए जाते हैं। इसकी पुष्टि स्थानीय नागरिकों ने की हैं। 

बॉनफिक्स स्मैक के नशे का आदी हो गया रामू

पन्द्रह वर्षीय रामसेवक उर्फ रामू आज नशे का बुरी तरह से आदी हो चुका है और यह नशा पिछले 8 साल से करता आ रहा है। रामू बोनफिक्स ट्यूब का नशा करता था लेकिन जब से शिवपुरी स्मैक खुले रूप से मिलने की लगी तो वह उसका भी नशा करने लगा हैं और कुछ ही देर में उसकी आंखे लाल हो जाती है। वह बोर्नफिक्स के ट्ï्ïयूव को कपड़े पर गिराता है और उसे तेजी से सूंघता है। उसके जीवन की कहानी भी अजीब रही। वर्षों पहले जब वह काम नहीं करता था तो पिता मारते थे जिसके चलते वह घर छोड़कर भाग गया। 

ट्रेन में पाउच बेचे और इसी दौरान उसकी मुलाकात नशे के आदियों से हो गई। जिन्होंने उसे बोर्नफिक्स (चिपकाने का ट्ï्ïयूव) का नशा करना सिखा दिया। आज वह मण्डी में टमाटर आदि बीनकर ढेर लगा लेता है और उन्हें बेचकर 15-20 रूपये कमा लेता है। जिससे उसकी ट्ï्ïयूव आ जाती है और उसका नशे का सुरूर दिन भर पूरा होता रहता है। पन्द्रह वर्षीय रामसेवक की इस बात को सुनकर और अधिक आश्चर्य होता है कि उसे शराब का नशा अब असर नहीं करता। वह शराब को पानी की तरह पी लेता है। शुरूआत में वह पढऩे भी गया लेकिन फिर पढाई में मन नहीं लगा। हालांकि वह यह भी कहता है कि नशे की लत के पीछे पापा-मम्मी उसे मारते हैं  लेकिन उसकी लत छूटती नहीं है। वह बस नशे के लिये पैसे की जुगाड़ में कबाड़ा बीनता हैं और दिन भर में 200 से 300 रूपए कमाकर नशे की सामिग्री खरीदने में खर्च कर देता हैं।

कबाड़ा बीनते हैं,मंदिर पर खा लेते हैं...

लगभग 9 वर्षीय शुभम को अपनी उम्र का पता नहीं है, पिता सन्याशी होकर घर छोड गये। तीन भाई और माँ है। चार साल पहले से उसने पढ़ाई छोड़ दी थी क्योंकि फीस देने के लिये माँ के पास पैसे नहीं थे। आज पढ़ाई से उसका मोह भंग हो गया है। वह हमउम्र दोस्तों के साथ कबाड़ा बीनता है, जरूरत पडऩे पर लोगों से भीख मांग लेता है और भूख लगती है तो मंदिर पर खाना खा लेता है। आज जब उससे पढऩे की इच्छा पूछी तो उसका कहना था कि अब पढ़ेंगे नहीं बस ऐसे ही फिरेंगे।

नशे की लत कहीं अपराधी न बना दे

जिस उम्र में दिमाग में पढ़ाई की चिंता और अपना भविष्य बनाने की सोच होनी चाहिये उस उम्र में इन बालकों के दिमाग में सिर्फ और सिर्फ नशे का सुरूर है और इस लत के लिये अभी तो वे कबाड़ व थोक मण्डी से सब्जी बीनकर जैसे-तैसे काम चला लेते हैं लेकिन बड़ती उम्र के साथ जैसे-जैसे नशा इन मासूमों को अपने आगोश में लेता जायेगा वैसे-वैसे रूपयों की दरकार भी बड़ती जायेगी और इसके लिये इन मासूमों के कदम अपराध की ओर भी बड़ सकते हैं और आगे चलकर इन्हें बड़ा अपराधी भी बना सकती है। 
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