क्या मड़वासा का मोढ़ा खत्म कर पाएगा महेन्द्र यादव की महाजनी | kolaras News

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। कोलारस विधानसभा में टिकट की लड़ाई काफी तेज हो गई है। सबके अपने समीकरण है और कई समीकरण सुबह से शाम तक बिगड़ भी रहे हैं। यहां कांग्रेस की तरफ से महेंद्र यादव का टिकट फाइनल माना जा रहा था और यादव समर्थक इस बात से खुश थे कि भाजपा की तरफ से टिकट या तो देवेन्द्र जैन को मिलेगा या वीरेन्द्र रघुवंशी को परंतु अब मड़वासा के सुरेन्द्र शर्मा का नाम भी चर्चाओं में हैं। इसके चलते हालात बदल रहे हैं। महेन्द्र यादव विरोधी तेजी से शर्मा के साथ लामबंद हो रहे हैं। 

क्यों ​बेफिक्र थे महेन्द्र यादव
भाजपा से केवल 2 ही पक्के दावेदार समझे जा रहे थे। देवेन्द्र जैन एवं वीरेन्द्र रघुवंशी। महेन्द्र यादव एंड कंपनी इस खबर से खुश थी। क्योंकि यदि देवेन्द्र जैन फिर से मैदान में आते हैं तो बिना मेहनत के ही चुनाव जीत जाएंगे और यदि वीरेन्द्र रघुवंशी आते हैं तो यादवों को अपने आप एकजुट होना पड़ेगा। रघुवंशियों के खिलाफ दूसरी जातियां भी यादवों के साथ आ जाएंगी। यानि दोनों में से कोई भी प्रत्याशी आए जीत महेंद्र यादव की टीम अपनी जीत सुनिश्चित मान रही थी। 

मड़वासा का मोढ़ा कहां से आ गया
पिछले दिनों खबर आई कि भाजपा से वीरेन्द्र रघुवंशी का टिकट फाइनल है। इसके साथ ही देवेन्द्र जैन ने सीएम हाउस जाकर प्रदर्शन कर डाला। उन्होंने मांग की कि कोलारस से किसी भी को टिकट दे दें, लेकिन दलबदलुओं को कतई ना दें। संकेत स्पष्ट था कि यदि वीरेन्द्र रघुवंशी को टिकट दिया तो भितरघात होगा। इधर संघ से एक संदेश आया कि यदि सत्ता विरोध की लहर से बचना है तो मध्यप्रदेश में 50 प्रतिशत नए चेहरों को टिकट दिया। इसी के साथ प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुरेन्द्र शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में आ गए। 

सुरेन्द्र शर्मा का जनाधार क्या है
मड़वासा मूल के सुरेन्द्र शर्मा लम्बे समय तक कोलारस से बाहर रहे लेकिन कोलारस उपचुनाव के समय वापस अपने गांव लौट आए। यहां उन्होंने भाजपा का नेटवर्क मजबूत करने का काम किया, इसके साथ ही मौके का फायदा भी उठाया। कोलारस विधानसभा की कुछ वर्षों पुरानी मांगें जिन पर कभी ध्यान नहीं दिया गया, उपचुनाव के दवाब में उन्होंने पूरी करवा लीं। उपचुनाव के बाद भी वो कोलारस के गांव-गांव तक जाते रहे और उनकी समस्याओं का समाधान कराया। कोलारस में लोग इन्हे सीएम हेल्पलाइन कहने लगे हैं। चूंकि शर्मा आरएसएस की पृष्ठभूमि से हैं ​इसलिए भाजपा में इनका विरोध नहीं है। कोलारस में फिलहाल इनका कोई गुट भी नहीं है। सबसे बड़ी फायदे की बात यह कि यादवों में कांग्रेस विधायक महेंद्र सिंह का काफी विरोध है परंतु इतना नहीं है कि वो देवेन्द्र जैन या वीरेन्द्र रघुवंशी के साथ खड़े हो जाएं लेकिन सुरेन्द्र शर्मा के मामले में बात बदल जाती है। यही कारण है कि महेंद्र यादव विरोधी कांग्रेसी भी सुरेन्द्र शर्मा के लिए लामबंद हो रहे हैं। 

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