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9/26/2018

SC/ST एक्ट के विरोधियों के निशाने पर आ सकती है यधोधरा राजे, सपाक्स ओर करणी सेना की कल होगी परीक्षा

शिवपुरी। हाल ही सांसद सिंधिया के तीन दिवसीय दौरे के दौरान जिले के अलग अलग क्षेत्रों में जिस प्रकार से करणीसेना और सपाक्स सहित अन्य सवर्ण संगठनों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को काले झण्डे दिखाकर एट्रोसिटी एक्ट के संशोधन प्रावधानों पर तीखा विरोध जताया उससे यहां कानून व्यवस्था की स्थिति बिगडऩे जैसे हालात निर्मित हो गए थे। सवर्ण संगठनों के साथ सिंधिया समर्थकों की हाथापाई से यहां का माहौल खासा बिगड़ गया था। अब केबिनेट मंत्री एवं भाजपा की कद्दावर नेता श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया के शिवपुरी में कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी उनके शिवपुरी क्षेत्र भ्रमण के दौरान इस प्रकार के विरोध के हालात निर्मित होने की पूरी पूरी आशंका गहरा गई है।
 
उल्लेखनीय है कि सांसद सिधिया के विरोध को सवर्ण संगठनों की ओट में भाजपा की राजनैतिक चाल बताया गया था जिससे इन संगठनों की नियत पर सवाल उठाए जाने का सिलसिला भी शुरु हो गया था करणी सेना के प्रदेश संयोजक अतुल सिंह के भाजपा के मंत्री जयभान को माल्यापर्ण करने जैसे फोटो सोशल साईट्स पर वायरल किए जाकर यह साबित करने का प्रयास किया गया कि उनका सिंधिया विरोध भाजपा के इशारे पर था। अब करणी और सपाक्स की कल परिक्षा हैं।  

ऐसे में करणीसेना के समक्ष अब मंथन का विषय यह बन रहा है कि भाजपा के नेताओं के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया जाए तभी उनकी राजनैतिक तटस्थता बरकरार रह सकती है। ऐसे में यहां भाजपा की केबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के समक्ष यदि प्रदर्शन होता है जैसी की पूरी पूरी आशंका बनी हुई है तो यह प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। 

इन संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि हमारा विरोध हर उस पार्टी के नेता से है जिनकी मौनप्रियता से एससी एसटी एक्ट के मनमाने प्रावधानों को मूर्त रुप मिला जाहिर सी बात है कि उनके निशाने पर भाजपा के नेता भी रहेंगे। ग्वालियर में सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में हालात यह हैं कि इन प्रदर्शनों के भय से नेता सार्वजनिक कार्यक्रमों से किनारा कर रहे हैं। 

इतना सब होने के बावजूद सांसद सिंधिया  ने क्षेत्र में अपना तीन दिनी दौरा कार्यक्रम रख जरुर लिया मगर उन्हें दो से तीन स्थानों पर सवर्ण संगठनों के प्रखर विरोध का सामना भी उन्हें यहां करना पड़ गया वह भी तब जबकि उनके निजी सुरक्षा दस्ते और तमाम कांग्रेस नेताओं ने उनके इर्दगिर्द सुरक्षा की कमान सम्हाली हुई थी। 

इस विरोध प्रदर्शन को प्रशासन भी हल्के में नहीं ले सकता क्योंकि चार रोज पूर्व यहां उग्र प्रदर्शन हो चुका है मगर तब मामला विपक्ष के नेता से जुड़ा था और अब मामला ठीक उलट है क्योंकि यशोधरा राजे का सरकार में मंत्री होने के चलते अपना प्रोटोकाल है। 

सपाक्स और करणी सेना जैसे संगठनों का रोष सत्तापक्ष के नेताओं पर विपक्ष से कहीं अधिक है ऐसे में यहां क्या कुछ हालात बन सकते हैं यह देखना काबिले गौर होगा। सवर्ण संगठनों के प्रतीकात्मक विरोध पर कांग्रेसियों ने अतिउत्साह में जो उग्र प्रतिक्रिया यहां दर्शाई थी उसका जनता में ठीक संदेश नहीं गया है, ऐसे में भाजपा की अपनी रणनीति भी क्या रहती है इस पर भी इन संगठनों की निगाह बनी हुई है। 

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