10 करोड के ड्रेस घोटाले की शिकायत लोकायुक्त में, राजनीति शुरू | Shivpuri

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। पिछले दिनों चर्चा में आए जिले में हुए 10 करोड के ड्रेस घोटाले में एक नया मोड आ गया हैं। इस घोटाले की शिकायत डीपीसी के जांच प्रतिवेदन को आधार बनाकर लोकायुक्त से की गई हैं। लोकायुक्त की चौखट तक पहुंचे गणवेश का यह मुद्दा और भी ज्यादा गहराता नजर आ रहा है। वहीं प्रशासन द्वारा पूरे मामले की जांच कराने की बात कही गई है लेकिन अभी तक जांच कहां तक पहुंची, इसे लेकर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शिवपुरी राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले के प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में गणवेश वितरण का कार्य किया गया था।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला शिवपुरी के जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने डीपीसी शिरोमणि दुबे के जांच प्रतिवेदन व अन्य दस्तावेजों के साथ लोकायुक्त ग्वालियर में शिकायत की है। आशुतोष शर्मा का कहना है कि शिवपुरी जिले में डीपीसी शिरोमणि दुबे को राज्य शासन ने पारदर्शिता के लिए नियुक्त किया था। 

ताकि समूहों द्वारा खरीदी गई सामग्री की शतप्रतिशत जांच समय-समय पर करते रहें। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में कपड़े की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह उठाया है। उनके द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने पर जांच समिति से हटा देना गंभीर धांधली की ओर इशारा करता है। अभाविप और कांग्रेस द्वारा इस मामले में विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। 

वहीं आजीविका मिशन भोपाल से स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर धीरेंद्र शिवपुरी आए। छुट्टी वाले दिन केवल औपचारिकता पूरी कर चले गए। इस बात की भनक किसी को नहीं लगी। 

12 साल से प्रतिनियुक्ति पर हैं आजीविका मिशन के प्रबंधक 
लोकायुक्त शिकायत में आजीविका मिशन के प्रबंधक का बिंदु भी रखा है। जिसमें राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रबंधक अरविंद भार्गव मूल रूप से पशु चिकित्सा विभाग से हैं और प्रतिनियुक्ति पर 12 साल से आजीविका मिशन में जमे हैं। 

इस मामले में जानकारों को कहना हैं कि इस शिकायत के पीछे अपने साहब ही खड़े हैं। उनको बेआवरू कर जिले से रूखसत करने का प्रयास किया है। आगे इस घोटाले की आग कलेक्टर तक पहुंच जाए तो कोई बड़ी बात नही होगी। इसमें अभी कलेक्ट्रेट के कई बडे अधिकारी भी जांच की जद में आ सकते हैं। शासन के द्वारा जारी गाईड लाईन का पालन कराना या करना राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रबंधक की ही जिम्मेदारी नही थी, और भी जिले के अधिकारी की थी। 
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