SHIVPURI-GUNA फोरलेन धसक गई, मंत्री गड़करी द्वारा सम्मानित कंपनी ने बनाई थी

शिवपुरी। शहर से होकर गुजरा नेशनल हाईवे भी प्रारंभ होने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। नेशनल हाईवे-46 शिवपुरी-गुना सेक्शन पर इरकॉन कंपनी ने फोरलेन सडक़ प्रोजेक्ट निर्धारित अवधि के डेढ़ महीने पहले ही पूरा कर लिया। जल्दबाजी में प्रोजेक्ट का काम पूरा करने पर गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा गया। 

जबकि केन्द्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 23 जुलाई 2018 को एनएचआई की तरफ से इरकॉन कंपनी को प्रशस्ति पत्र भी जारी कर दिया। यह फोरलेन सडक़ पहली ही बारिश में 15 जुलाई को ही धसक गई। फोरलेन सडक़ प्रोजेक्ट जल्दी पूरा कर उपलब्धि हासिल करने की चाह में सडक़ की गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा गया। जिसका खामियाजा आज सडक़ पर दौड़ रहे वाहन चालकों को उठाना पड़ रहा है। 

सडक़ धसकने सहित अन्य खामियों की वजह से अभी तक कई हादसे सामने आ चुके हैं। यही नहीं दुर्घटनाओं की संभावना अभी भी बनी हुई है। जिससे वाहन चालक और मुसाफिरों को भी जान का खतरा बना हुआ है। सडक़ की हालत समय रहते नहीं सुधारी जा सकी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की मॉनीटरिंग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कोलारस और बदरवास सहित आसपास पुल-पुलियाओं में दरारें आईं हैं। धसकने से कई जगह सडक़ भी उखड़ चुकी है। एनएचआई की तरफ से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। 

इन स्थानों पर फोरलेन सडक़ की हालत खराब 
बदरवास के नजदीक श्रीपुर गांव के पास एक छोटी पुलिया व बड़ा पुल धंसका है। जिससे उसमें दरार आ गईं हैं। एक तरफ की रोड बंद कर दी है। दूसरी रोड से वाहन गुजर रहे हैं।  बदरवास के पास घुरवार रोड पर ब्रिज के नीचे सर्विस रोड धसक चुकी है। जिससे वाहन चालक डिवाइडर से भी ज्यादा हिचकोले खाते हैं। ब्रिज के ऊपर लाईट चालू नहीं होने से दुर्घटना की संभावना है।  


कोलारस फोरलेन बायपास पर गुंजारी नदी पुल धंसक गया है। इसके अलावा दो-तीन स्थानों पर भी रोड धसकी है। यहां भी एक तरफ की रोड बंद कर दी है। मेंटीनेंस का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है।  शिवपुरी से निकलते ही सेसई गांव के पास रोड धसक गई है और पुलिया में दरार आ गई है। यहां से वाहन स्पीड में गुजरते ही अनियंत्रित हो जाते हैं। 

प्रारंभ होने से पहले ही धंसक गया रेलवे क्रॉसिंग का पुल
शहर के बायपास से निकला हाईवे पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। अभी बायपास चालू भी नहीं हो पाया है यहां बायपास पर रेलवे क्रॉसिंग पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। इसको लेकर शिवपुरी समाचार डॉट कॉम पहले भी खबरें प्रकाशित कर चुका है। खबर प्रकाशन के बाद फोरलेन निर्माण कंपनी इनको छुपाने के प्रयास में जुट गई। 

वेबसाइट पर प्रशस्ति पत्र अपलोड कर अपनी पीठ थपथपा रही कंपनी 
इरकॉन कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर प्रशस्ति पत्र के साथ शिवपुरी-गुना फोरलेन सडक़ प्रोजेक्ट के बारे में लिखा है। कंपनी ने अपनी दक्षता साबित की है। जिसमें नेशनल हाइवे-46 के शिवपुरी गुना सेक्शन पर फोरलेन सडक़ बनाने का प्रोजेक्ट निर्धारित समय से पहले पूरा करने का जिक्र है। पहले फेज की लंबाई 85 किमी है जिसका निर्माण 759 करोड़ की लागत से डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) आधार पर किया है। इरकॉन की अधीनस्थ कंपनी शिवपुरी-गुना टोल-वे लिमिटेड ने 25 जनवरी 2016 को फोरलेन प्रोजेक्ट का काम शुरू किया था जिसे 30 महीने यानी 24 जुलाई 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य था। 

लेकिन कंपनी ने 7 जून 2018 यानी डेढ़ माह पहले ही प्रोजेक्ट कंप्लीट कर लिया। कंपनी के इस दावे पर एनएचएआई की तरफ से केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने 23 जुलाई को इरकॉन कंपनी को प्रशस्ति प्रमाण पत्र दिया है। 

अभी तक यह हादसे हो चुके हैं 
शिवपुरी के नजदीक सेसई गांव के पास पुलिया धसकी है। आनंदपुर ट्रस्ट से गुरुपूर्णिमा पर्व मनाकर लौट रहे संत व शिष्यों की कार अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में संत व उनके शिष्य गंभीर रूप से घायल हो गए। कोलारस बायपास पर एक तरफ का रास्ता बंद कर देने से कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। चालक बाल-बाल बचा। इसी तरह बदरवास के पास बस सडक़ किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई जिससे चार-पांच यात्री घायल हो गए। इसके अलावा भी छिटपुट हादसे हो चुके हैं। 

बदरवास बायपास ब्रिज पर लाइट लगी है लेकिन इन्हीं चालू नहीं किया गया है। इसके अलावा नगर में प्रवेश वाले स्थानों पर भी लाईट अथवा रेडियमयुक्त संकेतक नहीं थे। पहले से दुर्घटनाग्रस्त ट्रक में कार टकरा गई। जिससे सीहोर के आष्टा निवासी चार शिक्षकों की अकाल मौत हो गई जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बदरवास फोरलेन बायपास पर आज भी अंधेरे में डूबा रहता है। 

इनका कहना है-
गुना-शिवपुरी फोरलेन सडक़ किस वजह से उखड़ी है, यह जांच का विषय है। सडक़ जिन स्थानों पर धसकी है, उन स्थानों पर रिपेयरिंग का काम जल्द पूरा करवाएंगे। गुना प्रोजेक्ट डायरेक्ट से बात करता हूं। 
विवेक जायसवाल, रीजनल ऑफिसर, एनएचएआई भोपाल 
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