डीएम में डीपीसी का डर, शासन के आदेश पर बचकाना बयान

ललित मुदगल@एक्सरे/शिवपुरी। शासन के किसी भी आदेश को पालन करना एक कलेक्टर की पहली जिम्मेदारी होती है लेकिन शिवपुरी कलेक्टर शिल्पा गुप्ता ने शासन के एक आदेश के मामले में बचकाना बयान दिया है। आदेश भी एक ऐसे मिशन का है जिसकी वह मिशन संचालक है। इस कारण कलेक्टर की इस आदेश पर दोगुनी जिम्मेदारी है। 

हम बात कर रहे है सर्व शिक्षा अभियान की। इसी अभियान के राज्य शासन से जारी आदेश को लेकर किए गए सवाल के जबाब में उनका उत्तर ऐसा आया जैसे हम बचकाना कह सकते है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि डीम के अंदर भी डीपीसी का डर देखा गया है, इससे पूर्व इस डर के चलते पूर्व कलेक्टर राजीव चंद्र दुबे ने एक हाईकोर्ट के आदेश का अपने हिसाब से मतलब निकाल लिया था। 

सबसे पहले आदेश पढें, यह था शासन का आदेश 
जानकारी के अनुसार राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल से एक आदेश, आदेश क्रमांक/राशिके/एस.जी यू/2017/5881 दिनांक 11-8-2017 को मप्र के समस्त कलेक्टरो को निकाला गया। आदेश का मूल उद्देश्य यह था कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एंव छात्रावासो की वार्डनो को प्रभार 3 वर्ष की अवधि तक ही दिया जा सकता है। उन्है वार्डन का प्रभार आगामी 3 वर्ष तक नही दिया जा सकता है। ओर यह कार्य अकादमिक वर्ष 2017-2018 1 अगस्त 2017 तक कर लिया जावे। 

इसके बाद राज्य शिक्षा केन्द्र ने अपर मिशन संचालक अनुभा श्रीवाास्तव ने इस ममाले को रिमांईडर पत्र क्रमांक राशिके/एसजीयू/2018/दिनांक 3-5-2018 को लिखा। लेकिन शिवपुरी में आज दिनांक तक इस राज्य शासन के आदेश का पूर्णता पालन नही हो सका। 

शिवपुरी में क्या स्थिती
जानकारी के अनुसार सर्व शिक्षा अभियान जिला शिवपुरी के अंतर्गत जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यायल एवं छात्रावासों की संख्या 16 बताईं जा रही है। बताया जा रहा है कि 16 में से 3 छात्रावासो की संचालिका वार्डन को बदल दिया गया है। बाकी 13 को अभी बदला जाना बाकी है। वार्डनों को बदलने के लिए राज्य शासन ने सर्व प्रथम गाईडलाईन और आदेश 11-8-2017 के और लगभग 10 माह पूर्व किए थे। 

शासन के इस आदेश के बाद डीपीसी शिरोमणि दुबे ने सन 17 में फाईल शुरू कर दी थी लेकिन यह चलकर कहां पंहु्ची यह किसी को पता नही है। बस फाईल चल रही है। बताया जा रहा है कि शासन के इस आदेश का डर दिखाकर छात्रावासों से वसूली की प्रकिया अवश्य तेज गाति से चल रही है। जिस वार्डन ने ऐक्टेशन के लिए भुगतान कर दिया वह वही है जिसने नही किया उसका ट्रांसफर कर दिया गया। इस कारण छात्रावासों के ट्रांसफर के आदेश के फाईल सिर्फ चली ही रही है। अपनी मंजिल तक नही पहुंची है। 

इस मामले में दिया कलेक्टर शिल्पा गुप्ता ने बचकाना बयान
जैसा कि विदित है कि जिले के सर्व शिक्षा अभियान का पदेन कलेक्टर मिशन संचालक, जिला पंचायत सीईओ जिला परियोजना संचालक ओर सर्वशिक्षा अभियान के जिला केन्द्र के अधिकारी को जिला परियोजना समन्यवक डीपीसी कहा जाता है। कुल मिलाकर इस अभियान के जिले से सबसे वरिष्ठ अधिकारी मिशन संचालक होता है। 

राज्य शिक्षा केन्द्र की अपर मिशन संचालक अनुभा श्रीवास्तव के इन आदेशों के अमलीकरण को लेकर कलेक्टर शिल्पा गुप्ता से बातचीत की तो उन्होने बचकाना बयान देते हुए कहा कि यह मेटर डीपीसी का होता है और उन्ही से इस मेटर पर आप चर्चा करें। शायद मेडम भूल गई कि वे सर्व शिक्षा अभियान के इस मिशन की मिशन संचालक है और यही नही शासन के किसी भी ओदश को फॉलो कराना ओर उसे अंजाम तक पहुचना भी कलेक्टर का काम होता है। 

इससे सिद्ध होता है कि संघ की शक्ति से युक्त डीपीसी शिरोमणि दुबे का डर अपनी डीम में देखा जा रहा है। इससे पूर्व भी पूर्व कलेक्टर राजीव चंद्र दुबे ने भी हाईकोर्ट के आदेश के व्याख्या अपने हिसाब से कर डीपीसी शिरोमणि दुबे को लाभ पहुंचाया था। अब देखते है कि इस मामले में आगे क्या होता है। 

छात्रावास वार्डनो की फाईल अब सरकती है कि नही..................इनके ट्रांसफर होते है कि नही..........कलेक्टर शिल्पा गुप्ता इस राज्य शासन के आदेश को अमल में ला पाती है कि नही..........या फिर जो अभी चल रहा है कि  राज्य शासन के इस आदेश का डर दिखाकर कर छात्रावासो की वार्डनो से ऐक्टेशन नियम से वसूली चलती रहेगी..........सबाल बहुत खडे है अपने जबाब के इंतजार में.........
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