यहां अपनी जमींन की रजिस्ट्री कराने से पहले चढानी पडती है पटवारी को भेंट, प्रशासन पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप

शिवपुरी। पूरे मध्यप्रदेश में जो नियम कहीं लागू नहीं है वह अवैधानिक रूप से करैरा में लागू है। करैरा में दस्तोवजों के पंजीकरण के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय से पहले क्रेता और विक्रेता को पटवारी के यहां चक्कर लगाना पड़ते हैं और आरोप है कि प्रत्येक रजिस्ट्री पर पटवारी द्वारा 3 हजार रूपए की अवैध वसूली की जाती है। इसके बाद ही पटवारी दस्तावेज को रजिस्ट्री के लिए पात्र घोषित करता है इससे करैरा में प्रशासन के इस फरमान के प्रति नागरिकों में नाराजी बनी हुई है। 

तत्कालीन एसडीएम अंकित अष्ठाना ने पंजीयन विभाग में अपने दखल को बढ़ाने के लिए अवैधानिक रूप से एक आदेश जारी कर दिया था कि जब तक दस्तावेजों पर पटवारी के सहमति के हस्ताक्षर नहीं होंगे उसका पंजीयन नहीं किया जाएगा। इस नियम की आड़ में पटवारियों के लिए भ्रष्टाचार की एक ओर दुकान खुल गई। आदेश में यह भी कहा गया था कि बिना डायवर्सन के प्लॉटों की रजिस्ट्री नहीं होगी। जबकि नियमानुसार यह आदेश भी अवैधाानिक है। 

लेकिन प्रशासन के इस फरमान से करैरा में हडक़ंप का वातावरण व्याप्त है। नागरिकोंं का कहना है कि प्रशासन के इस आदेश की आड़ में पटवारी राकेश गुप्ता धड़ल्ले से अवैध वसूली में लगे हुए हैं और प्रत्येक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए पटवारी द्वारा तीन हजार रूपए वसूले जा रहे हैं। आरोप है कि नए एसडीएम के आने के बाद पटवारी अब खुलेआम वसूली में लिप्त है। 

करैरा में पूर्व में एसडीएम आईएस अंकित अस्थाना द्वारा बिना डायवर्सन के रजिस्ट्री पर रोक लगाने के आदेश दिये थे लेकिन सभी आदेशो को ताक पर रखकर पटवारी द्वारा लगभग 7 रजिस्ट्री करवाई गई और प्रति रजिस्ट्री के हिसाब से 3000 रुपये पटवारी द्वारा लिये गये एवं पटवारी द्वारा कहा गया कि मुझे ऊपर वालों को भी देना पड़ता है मै अकेला अपनी जेब में नही रखता हूं । 

नगर पंचायत ने पारित किया पटवारी को हटाने का प्रस्ताव 
करैरा नगर पंचायत अध्यक्ष कोमल साहू का कहना है कि नगर पंचायत के पास पटवारी के भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार आ रही थीं। इसके बाद नगर पंचायत ने ठहराव कर पटवारी को हटाने का प्रस्ताव पारित किया और उक्त प्रस्ताव को कलेक्टर के पास भेज दिया है। श्री साहू का आरोप है कि पटवारी राकेश गुप्ता लोकल है और उसके स्थान पर किसी अन्य पटवारी को चार्ज दिया जाए एवं प्रशासन के अवैधानिक फरमान को निरस्त किया जाए। 

इनका कहना है
पटवारी राकेश गुप्ता के खिलाफ पैसे लेने की शिकायत मेरे पास भी आई थी, लेकिन जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला है। उनका कहना है कि मुझे नहीं मालूम मेरे पूर्ववर्ती एसडीएम ने दस्तावेज के पंजीकरण के पूर्व पटवारी की सहमति का आदेश क्यों निकाला था। उक्त आदेश वैधानिक है अथवा अवैधानिक इसके विषय में मैं कुछ नहीं जानता हूं। 
एसबी पांडे, एसडीएम करैरा
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