सदकर्मों के कारण हमेशा दिलों में जीवित रहेेंगे प्रोफेसर सिकरवार

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। आदर्श प्राध्यापक और शिक्षाविद् प्रोफेसर डॉ. चंद्रपाल सिंह सिकरवार की तीसरी पुण्यतिथि आज उनके शिष्यों और प्रबुद्ध नागरिकों ने कर्मचारी भवन में मनाई। इस अवसर पर अमृत वाणी का पाठ किया गया। हनुमान मंदिर में गरीबों को भोजन कराया गया तथा डॉ. सिकरवार के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रृद्धांजलि दी गई। वहीं उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलूओं को उजागर कर यह स्पष्ट किया गया कि डॉ. सिकरवार भले ही सशरीर हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके आदर्श और विचार निरंतर हमें प्रेरणा देते रहेंगे। 

इस अवसर पर आयोजित श्रृद्धांजलि सभा में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कोचेटा ने बताया कि डॉ. सिकरवार में वे सभी गुण थे जिसके कारण वह हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। प्रसिद्ध संत तरूण सागर जी कहते हैं कि मरने के बाद तुम्हें लोग याद रखें इसके लिए आवश्यक है कि या तो पढऩे लायक कुछ कर डालो या लिखने लायक कुछ कर डालो। अर्थात् इंसान अपने कृत्यों और बहुमूल्य कृतियों के कारण याद रखा जाता है। श्री कोचेटा ने कहा कि डॉ. सिकरवार अपने सत्कर्मों और साहित्य के कारण हमेशा याद रखे जाएंगे। 

वह अध्यापक और गुरू नहीं बल्कि सदगुरू थे जिन्होंने न केवल अपने शिष्यों को शिक्षा दी बल्कि वह खुद शिक्षा थे। उनकी कथनी और करनी में कोई भेद नहीं था और वह सकारात्मकता के जीवंत प्रतीक थे। डॉ. सिकरवार जैसा व्यक्तित्व शायद ही कोई मिले जिनका कोई दुश्मन नहीं था। इस मायने में वह ईश्वर की अनुपम कृति थी। इंसान कैसा होना चाहिए यह डॉ. सिकरवार के माध्यम से भगवान ने हमें बताया था। 

सादा जीवन और उच्च विचार उनके व्यक्तित्व में था। ईश्वर के प्रति अनन्य आस्था और समय की पाबंदी कोई उनसे सीखे। श्री कोचेटा ने कहा कि सर ने हमें संदेश दिया है कि जब दुनिया से जाओ तो लोग तुम्हारे लिए रोएं, तुम्हें याद करें, लोगों के दिलों में मीठी मीठी यादें और आंखों में प्यार के आंसू छोडक़र जाओ। कार्यक्रम का सुंदर संचालन डॉ. दिग्विजय सिंह सिकरवार ने किया।
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