15 साल से दर्ज नही हुए एक भी एफआईआर, आस्था और अध्यात्म के कारण यह गांव बने विवाद विहिन

शिवपुरी। वर्तमान समय में गांवो में एक छोटी सी बात पर लडाई और झगडे होना आम बात है। अगर कहा जाए कि जिले में 3 गांव ऐसे ही है, जहां पिछले 15 वर्ष मेें इन गांवो में कोई लड़ाई-झगड़ा नही हुआ है और एक भी एफआईआर नही हुई है। यह बात आसानी से गले नही उतरती लेकिन ऐसा हुआ है। इस कारण पोहरी, कोलारस और करैरा के 3 गांव विवाद विहिन की श्रेणी में आए है। 

सोमवार को पोहरी के नानौरा पंचायत के धामौरा गांव में पहुंची जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस गांव को विवादविहीन ग्राम योजना 2000 के तहत चयनित किया है। प्राधिकरण के सामने ग्रामीण ने बताया कि धामौरा में लंबे समय से अपराध न होने की बड़ी वजह शराब और जुआ से पूरी तरह तौबा कर लेना है। इस गांव में सोमवार को शिविर लगाकर ग्रामीणों से चर्चा की गई। 

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाएगी गांवों की सूची 
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव एवं एडीजे प्रमोद कुमार जिला विधिक सहायता अधिकारी शिखा शर्मा ने ग्रामीणों से चर्चा की। गांव में कोई अपराध घटित नहीं होने पर एडीजे प्रमोद कुमार ने ग्रामीणों को बधाई दी। साथ ही कहा कि पुलिस थाने का रिकार्ड और तहसील कार्यालय से राजस्व संंबंधी मामलों की जानकारी लेंगे।

पिछले 15 साल में यदि एक भी विवाद नहीं निकला तो इस गांव को विवाद विहीन गांव घोषित करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर को प्रस्ताव भेजेंगे। हालांकि यदि कोई विवाद चल भी रहा है और मीडिएशन से सुलझाया जा सकता है तो 15 जुलाई को होने जा रही नेशनल लोक अदालत में समझौता कराकर गांव को विवाद विहीन कराने का प्रयास किया जाएगा। विवादहीन गांवों की सूची सुप्रीम कोर्ट के अधीन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण दिल्ली को भेजी जाएगी। जहां से सूचियां केन्द्र व राज्य सरकार को दी जाएगी। इसके बाद संंबंधित गांवों की ग्राम पंचायतों के सरपंचों को सम्मानित किया जाएगा। 

पोहरी के धामौरा गांव के अलावा करैरा की ग्राम पंचायत सिलापुरा के गांव बरसोरी और कोलारस की ग्राम पंचायत रुहानी के गांव कूढा जागीर को भी शामिल किया गया है। करैरा में मंगलवार और कोलारस में बुधवार को शिविर लगाया जाएगा। इन तीनों गांवों को विवादविहीन का प्रस्ताव एक महीने में तैयार कर जबलपुर भेजा जाएगा। 

ग्रामीण मंदिर पर बैठकर सुलझाते हैं विवाद, आस्था बड़ी है।  
400 की आबादी वाले धामौर गांव के 70 वर्षीय सीताराम धाकड ने बताया कि उनके गांव में अगर किसी में आपास में मनमुटाव और कहासुनी हो भी जाती है तो ग्रामीण जन मंदिर पर बैठकर मामले को सुलझा लेते हैं। पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने कोई नहीं जाता। गांव के लोग शिक्षित हैं और सहनशीलता का भाव रखते हैं। शराब-जुआ जैसी गलत लत नहीं होने से गांव में शांति का माहौल रहता है। बुजुर्गों ने यह भी कहा है कि धार्मिक आस्था के चलते गांव के व्यक्ति शराब आदि का सेवन नहीं करते और न ही जुआ खेलते हैं। 
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