Treadmill पर 5 साल तक दौड़ती रहीं यशोधरा राजे

उपदेश अवस्थी। ट्रेडमिल तो जानते ही होंगे आप, वह मशीन जिस पर लोग दौड़ लगाते हैं। मशीन अपनी जगह खड़ी रहती है। दौड़ने वाला एक इंच भी आगे नहीं बढ़ता लेकिन पसीने-पसीने हो जाता है। अपनी विधायक यशोधरा राजे सिंधिया के साथ भी कुछ ऐसा ही है। वो शिवपुरी की विधायक हैं। मप्र की कैबिनेट मंत्री हैं ​बावजूद इसके वो शिवपुरी के लिए कुछ नहीं कर पाईं। सिंध के पानी के लिए जिस तरह से उन्होंने दौड़धूप की वो ट्रेडमिल की दौड़ से ज्यादा कुछ नहीं थी। वो नगरपालिका पर आरोप लगातीं हैं, अधिकारियों पर आरोप लगातीं हैं। कंपनी से नाराज हो जातीं हैं। सवाल सिर्फ इतना सा है कि यदि आप अपने आॅफिस में बैठकर इन सबसे काम कराने की क्षमता ही नहीं रखतीं तो फिर किस बात की विधायक। 

वो तो अच्छा है कि यशोधरा राजे ने सांसद प्रहलाद पटेल की तरह औजार नहीं उठाए (उन्हे जहां कहीं भी कीचड़ दिखता है, नगरपालिका को सूचित नहीं करते। खुद फावड़ा लेकर उतर जाते हैं और फोटो खिंचवाते हैं।) नहीं तो ड्रामा और भी ज्यादा होता। हो सकता है जनता तालियां बजाती, थोड़ी बहुत सहानुभूति भी मिल जाती परंतु सच तो यह है कि सफल नेता उसी को कहते हैं जिसमें अपनी लीडरशिप मनवा लेने की ट्रिक हो। नेता वो जिसके पीछे जनता अपने आप चल दे। खुद को सुखी और सुरक्षित महसूस करे। विधायक वो जिसकी बात प्रशासन काट ना पाए। 

यशोधरा राजे खुद खिलाड़ी हैं। उन्हे मालूम है कि अच्छा घोड़ा होना जरूरी है परंतु यदि घुड़सवार अच्छा ना हुआ तो घोड़ा रेस नहीं जीत सकता और पर्चा दाखिल करने से पहले उन्हे पता था कि सरकारी घोड़ों की सवारी में कितना जोखिम होता है। यदि आप सरकारी घोड़ों की लगाम कसना ही नहीं जानतीं तो क्या जरूरत है कि पर्चा दाखिल करें और मैदान में उतरें। 

2013 से 2018 तक प्रदेश की तमाम मंत्रियों की विधानसभाओं को यदि देखें तो शिवपुरी की हालत ऐसी लगती है मानों यहां कोई निर्दलीय विधायक था। दशकों पुरानी सिंध के पानी की मांग पूरी करने में पसीने छोड़ दिए। जबकि प्रदेश के दूसरे कई शहरों में नदियों का पानी कब आ गया पता ही नहीं चला। चमचमाती सड़कें, सरकारी कॉलेज और वो सारी सुविधाएं जो संभव हैं। भाजपा के छोटे छोटे विधायकों ने अपनी विधानसभा में बड़े बड़े काम करा लिए। दतिया ही देख लीजिए, कभी एक ग्राम पंचायत की तरह हुआ करता था। आज महानगर सा लगता है। 

इसमें कोई दो राय नहीं कि आप शिवपुरी में उपलब्ध तमाम विकल्पों में सबसे बेहतर हैं। आपके भतीजे गुंडागर्दी नहीं करते। आपका बेटा ठेकेदारी नहीं करता। आपका भाई ब्याज पर पैसे नहीं देता। आपको खदानों की लीज नहीं चाहिए। आपकी संपत्ति में हर 5 साल में 200 गुना इजाफा नहीं होता। आपको रिश्वत देकर किसी भी कागज पर हस्ताक्षर नहीं कराए जा सकते। जुआ खेल रहे आपके खास समर्थक को गिरफ्तार करने में टीआई को डर नहीं लगता। आप किसी अपराधी को छुड़ाने के लिए पुलिस को धमकी नहीं देतीं। आप किसी अधिकारी से महीना नहीं मांगतीं। यदि कोई आम नागरिक आपके समर्थक के खिलाफ शिकायत करे तो आप उसे धमकी नहीं देतीं। निश्चित रूप से यह बहुत अच्छा है। इसीलिए शिवपुरी का संभ्रांत वर्ग आपका साथ देता है, हम सब आपको परिवार की बड़ी बेटी की तरह स्नेह करते हैं।  लेकिन बात बात पर रूठना, तुनकमिजाजी! ये राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकता। 

जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका सम्मान हुआ या नहीं। जनता को फर्क पड़ता है कि काम क्या हुआ। जरूरी यह नहीं कि सीएम आपका सम्मान करे या अधिकारी आपके सम्मान में झुक जाएं। जरूरी यह है कि जनता आपको प्यार करे। आप विधायक हैं, कैबिनेट मंत्री हैं लोग उम्मीद करते हैं कि आप वो कर दिखाएं जो किसी ने नहीं किया परंतु शायद आपको लगता है कि आप इससे ज्यादा कुछ हैं। क्योंकि आप सिंधिया हैं। जब तक आपके भीतर से 'श्रीमंत' नहीं निकलेगा। ये शहर तो पिछड़ा रहेगा ही, लेकिन 2018 का अंत आपके लिए भी सुखद नहीं होगा। हमारी पूज्य राजमाता के नाम पर आप कब तक वोट मांगती रहेंगी। 
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1 comments:

ravi tomar said...

बिल्कुल सही लिखा है आपने एक काम और होना चाहिए - एक शपथपत्र के साथ सभी राजनैतिक दलों को अपना घोषणापत्र कोर्ट में सबमिट करवाने चाहिए ताकि घोषणाएं पूरी ना करने पर देश की जनता को धोखे में रखने के लिए इनके ऊपर मुकदमा चलाया जा सके.

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