आज की कहानी, वही कहानी लोकप्रिय होती है जिसमें द्वंद होता है: राजनारायण

शिवपुरी। आज की कहानी अपने समय और अपने अंचल की बात करती है, इसलिए वह आम आदमी के ज्यादा करीब है। जब से कहानी में अधिकृत बयान आता है, तब से कहानी ज्यादा लोकप्रिय हुई है।’’ यह उद्गार थे वरिष्ठ कथाकार राजनारायण बोहरे के। मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की शिवपुरी इकाई द्वारा आयोजित ‘आज की कहानी’ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अंचल के सशक्त कथाकार राजनारायण बोहरे का कहना था कि ‘‘कहानी में द्वंद्व जरूरी है। वही कहानी लोकप्रिय होती है, जिसमें द्वंद्व होता है।

आज की कहानी पर चर्चा की शुरूआत नगर की जानी-मानी कथाकार पद्मा शर्मा ने की। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा सुभद्राकुमारी चौहान पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती शर्मा का कहना था कि ‘‘आज की कहानी में विचार ज्यादा है, लेकिन संवेदनाएं नहीं। जबकि किसी भी कला के लिए संवेदनाएं बेहद जरूरी हैं। संवेदनाओं के अभाव में कोई रचना बेहतर नहीं हो सकती।

स्थानीय हैप्पीनेस होटल में आयोजित ‘आज की कहानी’ कार्यक्रम की शुरूआत अतिथि कथाकारों के स्वागत से हुई। स्वागत भाषण और कार्यक्रम की भूमिका मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की जिला इकाई के अध्यक्ष विनय प्रकाश जैन ‘नीरव’ ने, तो आमंत्रित कथाकारों का संक्षिप्त परिचय कार्यक्रम के संयोजक लेखक जाहिद खान ने दिया। कार्यक्रम के पहले चरण में जितेन्द्र बिसारिया (भिण्ड) ने अपनी कहानी ‘भिए बिनु धर्म न होए’, बृज मोहन (झांसी)-‘लाचारी’, कविता वर्मा (इंदौर)-‘विलुप्त’ और राजनारायण बोहरे (इंदौर)-‘इकल सूमड़े’ का वाचन किया। सभी कहानियां मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण और समाज की कुरीतियों पर प्रहार करने वाली थीं, जिनको श्रोताओं ने खूब सराहा। 

कहानी पाठ के बाद सवाल-जवाब का दौर चला, जिसमें श्रोताओं ने भागीदारी करते हुए, अपने भावों का प्रकटीकरण किया। नाट्यकर्मी दिनेश वशिष्ठ का कहना था कि आज का कार्यक्रम सुनकर मैं काफी रोमांचित हूं। एक अच्छे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए मैं, मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन को बधाई देता हूं। प्रगतिशील लेख संघ के जिला अध्यक्ष प्रोफेसर पुनीत कुमार का कहना था कि आज की कहानियां सुनकर मुझे आश्चर्यमिश्रित खुशी हुई है। कवि अरुण अपेक्षित का कहना था कि कहानी में सूत्र वाक्यों और प्रतीकों में अपनी बात कह देना, बड़ी बात होती है। 

मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने आगे कहा, सम्मेलन ने साहित्य को काफी समृद्व किया है। वहीं झांसी से आए कवि साकेत सुमन चतुर्वेदी ने कहानियों पर टिप्पणी करते हुए कहा, अंदाजे बयां से कहानी अनूठी बनती है। कार्यक्रम में जितनी भी कहानियां पढ़ी गईं, वे जमीन से जुड़ी हुई कहानियां थीं। इन कहानियों में प्रकट की गई संवेदनाएं, हमें बेहतर मनुष्य बनाती हैं। कार्यक्रम के अंत में मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की शिवपुरी इकाई ने कथाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम को सूत्र-दर-दर जोड़ते हुए बेहतरीन संचालन और आमंत्रित श्रोताओं का आभार इकाई सचिव कवि अखलाक खान ने किया। 

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