शिमला सी शिवपुरी पर मंडरा रहा है महा संकट, बदल रहा है ड्राई जोन में

शिवपुरी। शिमला से शिवपुरी पर अब महा संकट मंडरा रहा है। गर्मियो में शीतलता का एहसास देने वाला जिला अब धीरे-धीरे ड्राई जोन में बदला रहा है। पिछले 10 साल में शहर ही नहीं, बल्कि अंचलभर में जलस्तर 400 फीट नीचे चला गया है। यह लगातार और भी गिर रहा है। ऐसे में भू.गर्भ शास्त्री इसे चिंताजनक बता रहे हैं और उनका साफ कहना है कि समय रहते यदि लोग व प्रशासन सजग नहीं हुए तो पर्यटन नगरी आने वाले दिनों में हरियाली विहीन व भीषण जल संकट से जूझेगी।

पुराने बोर होने लगे फैल
लगातार घटते जल स्तर के कारण पुराने बोर पानी देना छोड़ रहे हैं, क्योंकि पुराने बोर की गहराई इतनी नहीं कि उनसे पानी निकल सके। पहले जब 150 से 200 फीट पर पानी भरपूर निकल आता था, तब लोग हैंडपंप या बोर के लिए खनन 150 से 200 फीट से ज्यादा नहीं करवाते थेए लेकिन पिछले एक वर्ष में जोर बोर हुए हैं वह 300 से 400 फीट गहरे किए जा रहे हैं। इससे जमीन को कई तरह का नुकसान है। गांव में जल स्तर गिर जाने से हैंडपंपों ने भी दम तोड दिया है। 

शहर में हुए हर 100 मीटर पर बोर
शहर की ही बात करें तो यहां पिछले साल अंधाधुंध तरीके से नलकूपों का उत्खनन कराया गया। हालात यह है कि शहर में कई इलाके तो ऐसे हैंए जहां 100 मीटर क्षेत्र में ही 2 से 3 नलकूप उत्खनित करा दिए गए हैं।

यह है तहसीलों की स्थिति
बैराड: बैराड में 12 महीने पानी की समस्या बनी रहती है। यहां के लोग 20 रुपए कट्टी पानी खरीद रहे हैं। गांव में पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए नलजल योजनाएं भी शुरू की लेकिन वह चालू होने से पहले ही दम तोड गईं।  

पानी की समस्या से निबटने के लिए पचीपुरा तालाब का निर्माण कराया गया हैए लेकिन समस्या अब भी विकराल बनी हुई है। यहां पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए पचीपुरा तलाब से बैराड तक पानी लाने की योजना तैयार की गई है लेकिन अभी तक सिर्फ  मटेरियल ही मौके पर आया है। 

पोहरी: यहां की 70 हजार आबादी ट्यूबवैलों, कुओं पर निर्भर है। आने वाले मई और जून महीनों में यहां की स्थिति और विकराल हो जाएगी। ट्यूबवैल पानी छोडऩे लगे हैं वहीं कुओं का भी जल स्तर 15 से 20 फीट नीचे चला गया है। 

करैरा: करैरा और आसपास के 32 गांव मिलाकर कुल जनसंख्या 1 लाख 25 हजार के आसपास है। यहां नारही खार व महुअर नदी से नगरवासियों को पानी उपलब्ध कराया जाता हैए लेकिन यह पानी पीने लायक नहीं है। नगर की आबादी 350 रुपए का टैंकर डलवाकर पानी की पूर्ति कर रही है। लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। 

कोलारस: कोलारस में 10 साल पहले 70 फीट पर पानी निकल आता था। अब यहां 450 फ ीट पर पानी मिल रहा है। नगरवासियों के लिए गुंजारी नदी से पानी मिलता थाए लेकिन यह नदी भी अब सूखी रहती है। नगर में दो दिन छोडयकर पानी की सप्लाई की जा रही है। 

पिछोर: यहां भी पेयजल की स्थिति ठीक नहीं है। जनता को पीने के लिए पानी के लिए फूटीबार तालाब से पानी की सप्लाई होती हैए यह तालाब भी कम वर्षा के कारण सूखने की कगार पर पहुंच गया है। इसके अलावा कई गांव ऐसे हैं जहां पानी की विकराल समस्या है। 

खनियाधाना: यहां दस साल में 160 फीट वाटर नीचे गिर गया है। यहां के निवासी पानी के लिए टैंकरों और नलों की सप्लाई पर निर्भर हैं। नवंबर माह में यहां पानी की समस्या गहराने लगी है। सप्लाई एक दिन छोडकर दी जा रही हैए लेकिन उसमें भी गंदा व बदबूदार पानी आ रहा है। 

जिले में 11 साल में इस तरह कम हुआ भू-जल स्तर
तहसील  2007 2018
शिवपुरी 400 1000
बैरा? 200 500
पोहरी 300 600
करैरा 150 400
पिछोर 400 650
खनियाधाना 70 170
कोलारस 800  400
नोट:  जल स्तर फीट में
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